डीआरडीओ के 67वें स्थापना दिवस के मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वरिष्ठ वैज्ञानिकों और अधिकारियों से मुलाकात की। उन्होंने भारत की स्वदेशी क्षमताओं को विकसित करने और रक्षा क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए उनकी सराहना की।
रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के 67वें स्थापना दिवस पर राजनाथ सिंह ने कहा कि डीआरडीओ निर्धारित उद्देश्यों को हासिल करने में बड़ी भूमिका निभाएगा। उन्होंने डीआरडीओ से तेजी से विकसित हो रही प्रौद्योगिकी को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में लगातार हो रहे सुधारों का मकसद भारतीय सेना को उत्कृष्ट बल के रूप तैयार करना है। उन्होंने इस मौके पर सशस्त्र बलों को अत्याधुनिक तकनीकों और उपकरणों से लैस करके देश की स्वदेशी क्षमताओं को विकसित करने व निजी क्षेत्र के साथ सहयोग से रक्षा क्षेत्र को मजबूत करने के लिए डीआरडीओ की प्रशंसा की।
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उन्नत देशों में अपनाए जा रहे उत्पादों और प्रक्रियाओं पर नजर रखें
उन्होंने डीआरडीओ से तेजी से विकसित हो रहे तकनीकी इको-सिस्टम के साथ तालमेल बिठाते हुए आगे बढ़ने और बदलते समय की आवश्यकताओं के अनुरूप उत्पाद तैयार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, वैज्ञानिक तकनीकी रूप से उन्नत देशों में अपनाए जा रहे उत्पादों और प्रक्रियाओं पर नजर रखें। उन्होंने कहा कि डीआरडीओ की प्रत्येक प्रयोगशाला को 2-3 महत्वपूर्ण परियोजनाओं की पहचान करनी चाहिए और उन्हें 2025 तक पूरा करना चाहिए। उन्होंने कहा, अगले स्थापना वर्ष तक, हमारे पास ऐसी 100 परियोजनाएं होनी चाहिए जो पूरी की जा चुकी हों।
2024 में 256 लाइसेंसिंग समझौतों पर हस्ताक्षर
रक्षा मंत्री ने कहा कि अब तक डीआरडीओ की ओर से विकसित प्रणालियों पर 1,950 प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (टीओटी) भारतीय उद्योगों को सौंपे गए है। 2024 में भारतीय उद्योगों के साथ 256 लाइसेंसिंग समझौतों पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं।