पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी स्थित सुकना मिलिट्री स्टेशन पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय सेना की त्रिशक्ति कोर (33 कोर) के जवानों के साथ दिवाली का पावन पर्व बड़े ही उत्साह के साथ मनाया। इस अवसर पर उन्होंने सैनिकों के साथ पारंपरिक 'बड़ा खाना' में हिस्सा लिया और उनके साथ रात्रिभोज भी किया।
जवानों को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि वे यहां किसी औपचारिक दौरे पर एक मंत्री की हैसियत से नहीं, बल्कि अपने परिवार के सदस्यों के बीच दिवाली की खुशियां बांटने आए हैं। उन्होंने सीमाओं की रक्षा में तत्पर सैनिकों के त्याग को नमन करते हुए देशवासियों और सरकार की तरफ से उनके परिवारों के कल्याण की पूरी जिम्मेदारी लेने का आश्वासन दिया।
बदले युद्ध के तौर-तरीके: साइबर हमले, ड्रोन और फेक न्यूज से मुकाबला
अपने संबोधन के दौरान राजनाथ सिंह ने सुरक्षा परिदृश्य में आ रहे तेजी से बदलावों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि सुकना केवल एक सामान्य सैन्य स्टेशन नहीं है, बल्कि यह पूर्वी भारत की संपूर्ण सुरक्षा संरचना की एक बेहद महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने जवानों को सतर्क करते हुए कहा कि आज युद्ध का रूप हाइब्रिड और बहुआयामी (हाइब्रिड वॉरफेयर) हो चुका है।
वर्तमान समय में दुश्मन केवल सीधे तौर पर सीमा पर नहीं आता, बल्कि साइबर हमलों, ड्रोन से निगरानी, सोशल मीडिया पर अफवाहों और फेक न्यूज (सूचना युद्ध) के जरिए देश और उसकी व्यवस्था को कमजोर करने का प्रयास करता है। ऐसे में सेना को हर पल 24 घंटे परिचालन तैयारियों और तकनीकी सतर्कता के साथ तैयार रहना होगा।
'पूर्वोत्तर भारत की आखिरी सीमा नहीं, बल्कि देश का पहला सिरा'
सुरक्षा दृष्टिकोण और पूर्वोत्तर भारत के सांस्कृतिक योगदान का जिक्र करते हुए रक्षा मंत्री ने एक नया दृष्टिकोण सामने रखा। उन्होंने कहा कि वे पूर्वोत्तर (नार्थ ईस्ट) को भारत का 'आखरी सिरा' (लास्ट फ्रंटियर) नहीं मानते, बल्कि इसे राष्ट्र का 'पहला सिरा' (फर्स्ट फ्रंटियर) मानते हैं।
राजनाथ सिंह ने कहा कि जब हम भारत के भूगोल, समृद्ध जैव विविधता, सांस्कृतिक विविधता और प्राचीन सभ्यता पर विचार करते हैं, तो पूर्वोत्तर क्षेत्र का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण नजर आता है। यह क्षेत्र न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता और अनूठी परंपराओं से भारत की पहचान को एक विशिष्ट आयाम प्रदान करता है, बल्कि देश की अखंडता और रक्षा का सबसे पहला संतरी भी है।
सैनिकों और उनके परिजनों के प्रति सरकार ने जताया आभार
जवानों का मनोबल बढ़ाते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि अपने घर-परिवार और अपनों से दूर रहकर दुर्गम इलाकों और प्रतिकूल परिस्थितियों में देश की हिफाजत करना असाधारण देशभक्ति की मिसाल है। उन्होंने स्वीकार किया कि त्यौहारों के अवसर पर घर की याद आना स्वाभाविक है, लेकिन देश की सुरक्षा के प्रति सैनिकों का यह अद्वितीय समर्पण ही पूरे राष्ट्र को निफिक्र सोने और जश्न मनाने का अवसर देता है। उन्होंने जवानों को पूरी तरह आश्वस्त किया कि सीमा पर तैनात वीर जवानों के परिजनों की सुरक्षा, सम्मान और उनकी हर जरूरत को पूरा करने के लिए सरकार कोई कसर नहीं छोड़ेगी।