रजनीकांत भाजपा के लिए दूर की कौड़ी इसलिए हैं क्योंकि सूबे की जातिय संरचना भाजपाई राजनीति के लिए महफूज नहीं हैं। पीएम मोदी की लोकप्रियता भी वहां जमीन पर असर नहीं डाल पा रही है। चंद दिनों पहले आए आरके नगर विधानसभा चुनाव परिणामों से भी यह स्पष्ट होता दिख रहा है कि भाजपा को यहां सियासी जमीन हासिल करने में और वक्त लगेगा।
पार्टी के उम्मीदवार को नोटा से भी कम वोट मिले थे। बताया जा रहा है कि मेडि़कल प्रवेश परीक्षा नीट को लेकर सूबे के लोगों में भाजपा और केंद्र सरकार के खिलाफ गुस्सा है। सूबे के छात्रों ने तमिलनाडु को नीट से बाहर रखने की पुरजोर मांग की थी। मगर ऐसा नहीं हो सका। ऊपर से पीएम मोदी के खिलाफ सूबे के अन्य सियासी दलों के एकजुट होने की भी संभावना है। यही वजह है कि रजनीकांत अभी सीधे तौर पर भाजपा के नजदीक दिखने से परहेज करेंगे। हालांकि भाजपा के कई आला नेताओं संग उनके रिश्ते बेहद अहम हैं।
गड़करी से खास हैं रजनीकांत के रिश्ते
केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी के साथ रजनीकांत के रिश्ते बेहद प्रागाढ़ बताए जा रहे हैं। दोनों के बीच वर्ष 2012 से बेहद करीबी के रिश्ते हैं जब गड़करी भाजपा के अध्यक्ष थे। बताया जाता है कि गड़करी और रजनीकांत जब आपस में मिलते हैं, तब दोनों मराठी में ही बातचीत करते हैं।
बावजूद उसके गड़करी ने रजनीकांत को जब 2014 के चुनाव से पहले भाजपा के साथ जोड़ने का प्रयास किया तब मामला परवान नहीं चढ़ सका था। इसके अलावा रजनीकांत की पत्नि लता रजनीकांत से भी भाजपा नेताओं के दोस्ताना संबंध बताए जाते हैं। सूत्र बताते हैं रजनीकांत को राजनीति से जोड़ने में मुख्य भूमिका उनकी पत्नी की रही है। भाजपा उनके जरिए भी कोशिश करेगी। मगर रजनीकांत ने खुद कहा है कि वे विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने अपने समर्थकों को अगले सालभर जमीन पर संगठन मजबूत करने को कहा है। सूबे के विधानसभा चुनाव वर्ष 2021 में होने हैं। राज्य विधानसभा में 234 सीटे हैं।