तृतीय विश्व वेद विज्ञान सम्मेलन के जरिए संघ परिवार विश्व के सामने मुंह बाए खड़ी सबसे बड़ी समस्या पर्यावरण संकट पर मैराथन मंथन करेगा। संघ का मानना है कि विश्व के संकट का समाधान भारतीय ज्ञान तंत्र (वेद की पुरातन परंपरा) के जरिए ही संभव है। तमाम वैज्ञानिक, तकनीकी और आर्थिक विकास के बावजूद भी समूचे विश्व को खतरनाक पर्यावरण, परिस्थितिकी और सैद्धांतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
ये चुनौतियां ऐसी हैं कि यदि इसपर तत्काल नियंत्रण नहीं पाया गया तो मानव जाति के अस्तित्व पर ही संकट खड़ा हो जाएगा। बल्कि कुछ वैज्ञानिकों ने इस बात का ऐलान भी कर दिया है कि यदि आलम यही रहे तो यह सदी मानवता की अंतिम सदी होगी। इसलिए विकास मॉडल में बदलाव की जरूरत है। संघ का कहना है कि यह बहुत आवश्यक है कि विश्व बिरादरी अपना नजरिया बदले। हमें मानव, मशीन और प्रकृति के बीच समन्वय बैठाते हुए आगे बढ़ना होगा।
सम्मेलन में होगा वैज्ञानिकों और दार्शनिकों का जमावड़ा
संघ के इस तृतीय विश्व वेद विज्ञान सम्मेलन में पर्यावरण से लेकर विकास के सिद्धांत पर मंथन के लिए पुणे में देश-विदेश के प्रमुख वैज्ञानिकों और दार्शनिकों का जमावड़ा लगेगा। सम्मेलन की अध्यक्षता नालंदा विश्वविद्यालय के वाईस चांसलर डा. विजय भटकर करेंगे। पहले दिन वैदिक और आधुनिक विज्ञान पर चर्चा के लिए जाने-माने वैज्ञानिकों के रूप में डा. अलेक्स हंके, अनिल राजवंशी, स्वामी आत्मप्रियानंद, बीएम हेगड़े, रामा जयसुंदर और वीके सारस्वत उपस्थित रहेंगे।
वहीं दार्शनिकों के रूप में स्वामी अग्रिवेश, गुरू मां आनंद मूर्ति, भद्रेश स्वामी, डेविड फ्रावले, हनीफ खां शास्त्री और किशन महाराज को आंमत्रित किया गया है। चार दिनों तक चलने वाले सम्मेलन में वेद, भारतीय दर्शन, संस्कृति सूचना, योग, कृषि और विज्ञान, मानवता और सामाजिक विज्ञान, स्वास्थ्य और धन, और कला तथा विज्ञान सरीखे विषयों पर अलग-अलग 30 सत्र आयोजित होंगे।
कार्यक्रम के अंतिम दिन संघ के सह सरकार्यावाह सुरेश सोनी, केंद्रीय मंत्री डा. हर्ष वर्धन और सत्यपाल सिंह अपने विचार रखेंगे। इससे पहले तमाम चर्चा के सत्रों में देश-विदेश से आने वाले वैज्ञानिक और दर्शनशास्त्री भी अपने अपने विचार रखेंगे।