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रजनीकांत को भाजपा मिलन के लिए करना होगा लंबा इंतजार

Thu, 01 Jun 2017 05:59 AM IST
संजय मिश्र/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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फिल्म अभिनेता रजनीकांत के दिल में भाजपा का राग बेशक पनप गया है। मगर भाजपा से औपचारिक मिलन के लिए उन्हें लंबा इंतजार करना पडेगा। भाजपा आलाकमान अभी राष्ट्रपति चुनाव तक कोई निर्णय के मूड में नहीं है। सूत्र बताते हैं कि राष्ट्रपति चुनाव यानि दो—तीन माह बाद ही भाजपा रजनीकांत को पार्टी में शामिल कराने के प्रयासों की शुरूआत करेगी।
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पार्टी की रणनीति अभी देखने और इंतजार करने की है। राष्ट्रपति चुनाव तक पाट्री आलाकमान किसी नए समीकरणों को नहीं पनपने देना चाहती है। अन्नाद्रमुक ने राष्ट्रपति चुनाव में भाजपा उम्मीदवार को समर्थन का न सिर्फ भरोसा दिया है बल्कि सूबे की पूरी सरकार पार्टी के इशारे पर चल रही है। यही वजह है कि रजनीकांत के मामले में भाजपा अभी देखों और इंतजार करो की नीति पर अमल कर रही है। हालांकि जल्द ही रजनीकांत की पीएम से भेंट हो सकती है। लेकिन पार्टी ने इसके मायने न निकालने की बात कही है। 

रजनीकांत के दिल में किसने जगाया भाजपा प्रेम 
तमिलनाडू की जनता के दिलों पर राज करने वाले रजनीकांत वैसे तो पीएम मोदी के प्रशंसकों में पहले से ही शूमार हैं। मगर उनके दिल में इन दिनों भाजपा राग शुरू हो गया है। और उनके दिल में भाजपा राग को जगाने का काम किसी और ने नहीं बल्कि उनकी पत्नि लथा रजनीकांत ने जगाया है। लथा रजनीकांत कुछ वरिष्ठ भाजपा नेताओं के लगातार संपर्क में हैं। पार्टी के एक महासचिव ने स्वीकार किया कि उनकी बातचीत रजनीकांत से तो होती है, मगर लथा रजनीकांत के साथ भी संवाद जारी है। पार्टी के उक्त नेता के अनुसार रजनीकांत के राजनीति में आने की चर्चाएं पहले भी उठती रही हैं। मगर इस दफे रजनीकांत के दिल में भाजपा का राग पनपा हुआ है। 
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रजनीकांत पर देखो इंतजार करो की नीति पर भाजपा 
रजनीकांत को भाजपा में शामिल करवाने के मामले में भाजपा अभी देखो और इंतजार करो की नीति का पालन कर रही है। राष्ट्रपति चुनाव के बाद ही पार्टी आलाकमान रजनीकांत के मामले पर गंभीरता से प्रयास करेगा। 

रजनीकांत को लेकर भाजपा में दो सोच 
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार रजनीकांत को लेकर अभी दो सोच है। उनकी लोकप्रियता के जरिए पार्टी को तमिलनाडू में अपने दम पर सत्ता की राह आसान नजर आ रही है। लेकिन भाजपा अभी जयाललिता की अन्नाद्रमुक के राजनैतिक आधार को भी दूसरे के पाले में नहीं जाने देना चाहती है। यही वजह है कि परदे के पिछे से भाजपा तमिलनाडू की सरकार को भी चलाए रखना चाहती है। रजनीकांत की भाजपा में सक्रियता अभी बढने से राज्य की सरकार पर भी असर पड सकता है। तो रजनीकांत के कुछ चहेते उन्हें भाजपा के बजाय जयललिता की अन्नाद्रमुक या अपनी पार्टी बनाकर राजनीति के मैदान में उतरने की सलाह दे रहे हैं। मगर भाजपा ने इस मामले में रजनीकांत की पत्नि से अपने तार जोड रखे हैं। 
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भाजपा के लिए रजनी क्यों है जरूरी 

तमिलनाडू की राजनीति लंबे समय से आकर्षक चेहरों के बदौलत संचालित होती आ रही है। यहां की जनता आम नेता के बजाय ग्लैमरस चेहरों पर ज्यादा भरोसा करती है। जिसके कारण अन्नाद्रमुक के संस्थापक एमजीआर लंबे समय तक तमिलनाडू की जनता के भगवान बने रहे।

राजनीति में उतरने से पहले एमजीआर फिल्म जगत के बडे चेहरा हुआ करते थे। तो उन्हें चुनौती देने वाले द्रमुक के प्रमुख एम करूणानिधि का संबंध भी फिल्मों से रहा है। एमजीआर के बाद अन्नाद्रमुक की कमान संभालने वाली जे जयाललिता भी राजनीति से पहले फिल्म अभिनेत्री रही थीं।

हालांकि तमिलनाडू की राजनीति में कुछ फिल्मी चेहरों को हार का भी मुंह देखना पडा है। एमजीआर और करूणानिधि को देखकर विजय कांत ने भी तमिलनाडू में राजनीतिक दल का गठन कर चुनाव लडा। मगर कई चुनावों के बाद भी उन्हें जनता का समर्थन नहीं मिल पाया है। अब रजनीकांत भी राजनीति के क्षेत्र में आने को बेशक सीधे स्वीकार नहीं कर रहे हैं। लेकिन राजनीति को लेकर उनके मन में भाव जरूर जग गए हैं। 

भाजपा के लिए रजनी क्यों है जरूरी 
भाजपा के लिए रजनीकांत इसलिए जरूरी हैं कि सूबे में उसके पास लोकप्रिय चेहरे का अभाव है। इसलिए रजनीकांत की लोक​प्रियता का लाभ उठाकर कर्नाटक के बाद भाजपा दक्षिण के दूसरे राज्य तमिलनाडू में अपना सरकार बनाने का सपना देख रही है। पार्टी रणनीतिकारों का आंकलन है कि ग्लैमरस चेहरों का तमिलनाडू की जनता पर गहरा राजनीतिक असर पडता है। मगर इसके लिए जरूरी है कि रजनीकांत पूरी तरह से भाजपा के विचारों को लेकर आगे बढें। 
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