फिल्म अभिनेता रजनीकांत के दिल में भाजपा का राग बेशक पनप गया है। मगर भाजपा से औपचारिक मिलन के लिए उन्हें लंबा इंतजार करना पडेगा। भाजपा आलाकमान अभी राष्ट्रपति चुनाव तक कोई निर्णय के मूड में नहीं है। सूत्र बताते हैं कि राष्ट्रपति चुनाव यानि दो—तीन माह बाद ही भाजपा रजनीकांत को पार्टी में शामिल कराने के प्रयासों की शुरूआत करेगी।
पार्टी की रणनीति अभी देखने और इंतजार करने की है। राष्ट्रपति चुनाव तक पाट्री आलाकमान किसी नए समीकरणों को नहीं पनपने देना चाहती है। अन्नाद्रमुक ने राष्ट्रपति चुनाव में भाजपा उम्मीदवार को समर्थन का न सिर्फ भरोसा दिया है बल्कि सूबे की पूरी सरकार पार्टी के इशारे पर चल रही है। यही वजह है कि रजनीकांत के मामले में भाजपा अभी देखों और इंतजार करो की नीति पर अमल कर रही है। हालांकि जल्द ही रजनीकांत की पीएम से भेंट हो सकती है। लेकिन पार्टी ने इसके मायने न निकालने की बात कही है।
रजनीकांत के दिल में किसने जगाया भाजपा प्रेम
तमिलनाडू की जनता के दिलों पर राज करने वाले रजनीकांत वैसे तो पीएम मोदी के प्रशंसकों में पहले से ही शूमार हैं। मगर उनके दिल में इन दिनों भाजपा राग शुरू हो गया है। और उनके दिल में भाजपा राग को जगाने का काम किसी और ने नहीं बल्कि उनकी पत्नि लथा रजनीकांत ने जगाया है। लथा रजनीकांत कुछ वरिष्ठ भाजपा नेताओं के लगातार संपर्क में हैं। पार्टी के एक महासचिव ने स्वीकार किया कि उनकी बातचीत रजनीकांत से तो होती है, मगर लथा रजनीकांत के साथ भी संवाद जारी है। पार्टी के उक्त नेता के अनुसार रजनीकांत के राजनीति में आने की चर्चाएं पहले भी उठती रही हैं। मगर इस दफे रजनीकांत के दिल में भाजपा का राग पनपा हुआ है।
रजनीकांत पर देखो इंतजार करो की नीति पर भाजपा
रजनीकांत को भाजपा में शामिल करवाने के मामले में भाजपा अभी देखो और इंतजार करो की नीति का पालन कर रही है। राष्ट्रपति चुनाव के बाद ही पार्टी आलाकमान रजनीकांत के मामले पर गंभीरता से प्रयास करेगा।
रजनीकांत को लेकर भाजपा में दो सोच
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार रजनीकांत को लेकर अभी दो सोच है। उनकी लोकप्रियता के जरिए पार्टी को तमिलनाडू में अपने दम पर सत्ता की राह आसान नजर आ रही है। लेकिन भाजपा अभी जयाललिता की अन्नाद्रमुक के राजनैतिक आधार को भी दूसरे के पाले में नहीं जाने देना चाहती है। यही वजह है कि परदे के पिछे से भाजपा तमिलनाडू की सरकार को भी चलाए रखना चाहती है। रजनीकांत की भाजपा में सक्रियता अभी बढने से राज्य की सरकार पर भी असर पड सकता है। तो रजनीकांत के कुछ चहेते उन्हें भाजपा के बजाय जयललिता की अन्नाद्रमुक या अपनी पार्टी बनाकर राजनीति के मैदान में उतरने की सलाह दे रहे हैं। मगर भाजपा ने इस मामले में रजनीकांत की पत्नि से अपने तार जोड रखे हैं।