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राजेंद्र प्रसाद जयंती: देश के पहले राष्ट्रपति को उपराष्ट्रपति, पीएम मोदी और राजनाथ ने दी श्रद्धांजलि

Thu, 03 Dec 2020 09:57 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद - फोटो : Twitter
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भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की तीन दिसंबर को जयंती है। उनका जन्म 1884 को बिहार के जीरादेई में हुआ था। 26 जनवरी 1950 से 14 मई 1962 तक उन्होंने देश के राष्ट्रपति के तौर पर अपनी सेवा दी। उनकी जयंती के मौके पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राजनाथ सिंह ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है।

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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राष्ट्रपति भवन में देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की जयंती के मौके पर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की।

उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा, 'पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद की जयंती पर उन्हें मेरी सादर श्रद्धांजलि। स्वतंत्रता संग्राम और संविधान निर्माण में उन्होंने अतुलनीय भूमिका निभाई। सादा जीवन और उच्च विचार के सिद्धांत पर आधारित उनका जीवन देशवासियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा।'

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति प्रसाद ने संविधान निर्माण में अतुलनीय भूमिका निभाई। उन्होंने लिखा, 'पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद की जयंती पर उन्हें मेरी सादर श्रद्धांजलि। स्वतंत्रता संग्राम और संविधान निर्माण में उन्होंने अतुलनीय भूमिका निभाई। सादा जीवन और उच्च विचार के सिद्धांत पर आधारित उनका जीवन देशवासियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा।'
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डॉ. प्रसाद को याद करते हुए कहा, 'भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी की जयंती के अवसर पर मैं उन्हें स्मरण एवं नमन करता हूं। देश को स्वाधीन कराने के लिए संघर्ष करने के साथ-साथ उन्होंने भारत की संवैधानिक परंपराओं के निर्माण में भी बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह देश उनके योगदान को हमेशा याद रखेगा।'

राजेंद्र प्रसाद की प्रारंभिक शिक्षा बिहार के छपरा जिला स्कूल से हुई थीं। केवल 18 साल की उम्र में उन्होंने कोलकाता विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा प्रथम स्थान से पास की और फिर कोलकाता के प्रसिद्ध प्रेसीडेंसी कॉलेज में दाखिला लेकर लॉ के क्षेत्र में डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की। वे हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, बंगाली एवं फारसी भाषा से पूरी तरह परिचित थे।

1962 में जब उन्होंने राष्ट्रपति के पद से अवकाश लिया तो भारत सरकार ने उन्हें 'भारत रत्न' की उपाधि से सम्मानित किया था। 28 फरवरी 1963 को उनका निधन हो गया। उनके चेहरे पर हमेशा मुस्कान बनी रहती थी, जो हर किसी को मोहित कर लेती थी। डॉ. प्रसाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एक से अधिक बार अध्यक्ष रहे।

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