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Rajasthan: किसकी टीम से बैटिंग कर रहे सचिन पायलट, केजरीवाल की पार्टी ने क्यों दिया समर्थन?

अमित शर्मा
Updated Tue, 11 Apr 2023 03:16 PM IST

सार

Rajasthan: कांग्रेस के कई नेता इस तरह के बयान दे रहे हैं, जिससे यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि जैसे राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा को राजस्थान में सफल बनाने के लिए अशोक गहलोत कैंप ने बेहतर काम किया। पार्टी नेता जयराम रमेश ने यात्रा की सफलता के लिए सीधे किसी का नाम लेने की बजाय पार्टी संगठन को श्रेय दिया...
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Rajasthan: Sachin Pilot - फोटो : Agency


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राजस्थान विधानसभा चुनाव में भी लगभग छह महीने का ही समय शेष है। अशोक गहलोत नई-नई योजनाएं बनाकर पार्टी को विधानसभा चुनाव में बढ़त की स्थिति में लाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे समय में सचिन पायलट का विरोध-प्रदर्शन क्या कांग्रेस को राजस्थान में कमजोर नहीं कर रहा है? इसका लाभ किसे मिल सकता है। AAP पार्टी जिस तरह उनके साथ खुलकर खड़ी हो गई है, उसके क्या मायने हैं और बड़ा प्रश्न है कि आखिर सियासत के बड़े खिलाड़ी सचिन किसकी टीम से बैटिंग कर रहे हैं?

सियासी अटकलबाजी गलत

सचिन पायलट के बेहद करीबी कांग्रेस नेता सुशील असोपा ने अमर उजाला से कहा कि इस तरह की अटकलबाजी पूरी तरह गलत है। सचिन पायलट कांग्रेस में हैं और कांग्रेस में ही रहेंगे। उनकी लड़ाई भ्रष्टाचार के विरुद्ध थी और इस समय उनका धरना भी भ्रष्टाचार के ही विरुद्ध है। इसे किसी अलग नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजस्थान में कांग्रेस की सरकार बनने से बहुत पहले से सचिन पायलट तत्कालीन वसुंधरा सरकार के खिलाफ अभियान चला रहे थे। सरकार बनने पर वसुंधरा सरकार के भ्रष्टाचारों पर कार्रवाई किए जाने का वादा जनता से किया गया था, जो अब तक पूरा नहीं हुआ है। ऐसे में सचिन पायलट केवल वही मुद्दे उठा रहे हैं जिसके लिए उन्होंने जनता से वादा किया था।

दो साल से उठा रहे मुद्दा

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इस समय यह बताने की कोशिश की जा रही है कि जैसे तीन साल के बाद अचानक सचिन पायलट ने वसुंधरा सरकार के खिलाफ मामले को उठाया है। जबकि सच्चाई यह है कि लगभग दो साल पहले मार्च 2022 में भी सचिन पायलट ने अशोक गहलोत को पत्र लिखकर वसुंधरा सरकार के खिलाफ जांच किए जाने की मांग की थी।

पिछले साल नवंबर में भी उन्होंने पत्र लिखकर अपने उस वादे पर काम करने के लिए कहा था, जिसका वादा जनता से किया गया था। लेकिन अब तक अशोक गहलोत सरकार ने वसुंधरा के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की, जिससे सचिन पायलट को जमीन पर उतरना पड़ा है।

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चूंकि, भ्रष्टाचार के विरुद्ध कोई भी बड़ा अभियान नेता को जमीनी तौर पर मजबूत करता है और यह सरकार के खिलाफ जाता है, सचिन पायलट का यह कदम उन्हें सियासी तौर पर मजबूत कर सकता है। चूंकि, उनके प्रतिद्वंदी अशोक गहलोत सरकार के कामकाज के जरिए जनता के बीच अपने को मजबूत करने का काम कर रहे हैं, ऐसे में सरकार या संगठन में किसी बड़ी जिम्मेदारी से मुक्त सचिन पायलट जमीन पर उतरकर राजनीति में अपनी प्रासंगिकता साबित कर रहे हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि सचिन पायलट के प्रदर्शन को कांग्रेस या राहुल गांधी के खिलाफ मानने की बजाय सचिन की अपनी जड़ों को मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है।

राहुल के साथ दिखे

कांग्रेस के कई नेता इस तरह के बयान दे रहे हैं, जिससे यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि जैसे राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा को राजस्थान में सफल बनाने के लिए अशोक गहलोत कैंप ने बेहतर काम किया। पार्टी नेता जयराम रमेश ने यात्रा की सफलता के लिए सीधे किसी का नाम लेने की बजाय पार्टी संगठन को श्रेय दिया। लेकिन चूंकि राजस्थान में पार्टी की कमान अशोक गहलोत के करीबी गोविंद डोटासरा के हाथ में है, माना जा रहा है कि इसके जरिए भी अशोक गहलोत की ही पीठ ठोंकी गई।     

लेकिन जब राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा राजस्थान पहुंची थी, तब से अपने अंतिम समय तक सचिन पायलट राहुल गांधी के साथ चलते हुए देखे गए थे। स्वयं राहुल गांधी ने भी सचिन पायलट को कांग्रेस का एसेट करार दिया था। ऐसे में आज अचानक सचिन पायलट के कदम को राहुल गांधी के खिलाफ बताना सही नहीं है।

आम आदमी पार्टी से कोई बातचीत नहीं

सुशील असोपा ने कहा कि राजनीति में हर बयान राजनीतिक लाभ के रूप में देखा जा सकता है। चूंकि आम आदमी पार्टी भ्रष्टाचार के विरुद्ध कार्रवाई की बात कहकर ही राजनीति में आगे बढ़ी है, और सचिन पायलट का यह प्रदर्शन भी भ्रष्टाचार के विरुद्ध है, उनके साथ खड़े होकर आम आदमी पार्टी एक सहानुभूति बटोरना चाहती है। लेकिन इसका यह अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए कि सचिन पायलट किसी दूसरी पार्टी के संपर्क में हैं या उनकी किसी से कोई बातचीत चल रही है।  

कौन निभाएगा वो वादा

दरअसल, सचिन पायलट के मन में एक टीस यह भी है कि जुलाई-अगस्त 2020 में जब अशोक गहलोत के खिलाफ उन्होंने आवाज उठाई थी, तब पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने ही उन्हें बाद में मुख्यमंत्री बनाने की बात कहकर ही मामले को शांत किया था। कथित तौर पर स्वयं राहुल गांधी, प्रियंका गांधी ने ही सचिन पायलट को बाद में मुख्यमंत्री बनाने का वादा किया था। कांग्रेस के वर्तमान अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी इस तथ्य से पूरी तरह परिचित हैं।

लेकिन अब जबकि विधानसभा चुनाव में महज छह महीने का ही समय शेष रह गया है, न तो उन्हें पार्टी का चेहरा बनाया जा रहा है और न ही चुनाव बाद के लिए उनसे कोई कुछ कह रहा है। उलटे जयराम रमेश और रंधावा के बयान उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने का अपराधी भी ठहरा रहे हैं। सचिन समर्थकों का मानना है कि ऐसे में एक मजबूत नेता के लिए सड़क पर उतरने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है और सचिन अपने उसी आखिरी हथियार को आजमा रहे हैं।

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