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Rajasthan Crisis: मुकुल रोहतगी बोले- बहुमत परीक्षण का इंतजार क्यों नहीं कर सकते गहलोत

Sat, 25 Jul 2020 10:56 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मुकुल रोहतगी (फााइल फोटो) - फोटो : PTI
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राजस्थान उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को हुई सुनवाई में पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट और 18 विधायकों की स्पीकर सीपी जोशी द्वारा जारी किए गए नोटिस के खिलाफ याचिका को स्वीकार कर लिया। अदालत ने स्पीकर को यथास्थिति बरकरार रखने का निर्देश दिया है। सर्वोच्च न्यायालय पहले ही मामले में उच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र पर एक मामले की सुनवाई कर रहा है। इसी बीच पायलट और बागी विधायकों की तरफ से अदालत में पक्ष रख रहे वकील मुकुल रोहतगी ने स्थिति को लेकर अपने विचार व्यक्त किए।

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जब रोहतगी से पूछा गया कि राजस्थान उच्च न्यायालय के आदेश में क्या है तो उन्होंने कहा, 'यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण आदेश है। यदि कोई विधायक, मुख्यमंत्री या पार्टी के किसी वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ अपनी आवाज उठाता है और उसके पास वैध कारण हैं और इसे नहीं सुना जा रहा है तो क्या इस कृत्य के लिए उस विधायक को अयोग्य ठहराया जा सकता है जिसके लिए वह पांच साल के लिए चुनकर आया है? यह एक सवाल है।'

उन्होंने कहा कि यदि पायलट विपक्ष की रैली में जाते हैं या सरकार को बर्खास्त करने की मांग करते हैं तो यह स्पष्ट संकेत है कि वो पार्टी छोड़ना चाहते हैं। लेकिन पार्टी के अंदर रहकर एक विधायक का अपने नेता के खिलाफ बोलना उसे अयोग्य ठहराए जाने का आधार नहीं हो सकता है।
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मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जब रोहतगी से पूछा गया कि बागियों द्वारा केंद्र को पक्षकार बनाना क्या इस बात को संकेत नहीं है कि वे भाजपा के साथ हैं तो उन्होंने कहा कि यह गलत धारणा है। जब भी कानून या संविधान के प्रावधान को चुनौती दी जाती है, तो यह पक्षकार पर निर्भर करता है कि वह भारत सरकार को शामिल करती है या नहीं क्योंकि भारत सरकार को अपने कानूनों और संविधान का बचाव करना होता है।
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जब उनसे पूछा गया कि शुक्रवार को राजस्थान के राज्यपाल ने विधानसभा का सत्र बुलाने की इजाजत न देने को लेकर काफी बहस हुई। क्या वे सरकार द्वारा बाध्य हैं तो वरिष्ठ वकील ने कहा कि राज्यपाल एक संवैधानिक व्यक्ति हैं। वे केवल मुख्यमंत्री की बात मानने के लिए नहीं बैठे हैं। राज्यपाल कोविड-19 की स्थिति को देखते हुए अगले दो हफ्ते तक विधानसभा सत्र को रोक सकते हैं। राज्य में विपक्ष बहुमत परीक्षण की मांग नहीं कर रहा है। मुख्यमंत्री खुद इसकी मांग कर रहे हैं। ऐसे में उन्हें 10-20 दिन का इंतजार करना चाहिए। उन्हें जल्दी क्या है? वे अपने लिए बहुमत साबित करना चाहते हैं।

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