कांग्रेस के बागी सचिन पायलट को लेकर भाजपा अपने पत्ते नहीं खोल रही। हालांकि पूरी संभावना है कि पायलट फिलहाल भाजपा में आने के बदले कांग्रेस में सीएम गहलोत विरोधी विधायकों की संख्या बढ़ाने पर काम करेंगे। उनकी रणनीति कांग्रेस में रह कर खुद की छवि प्रताड़ित नेता की बनाने की है। अगर कांग्रेस ने पार्टी से निकाला तो पायलट नई पार्टी का विकल्प चुनेंगे। हालांकि उनका अंतिम पड़ाव भाजपा ही होगा।
हालांकि कांग्रेस से बगावत के बाद पायलट लगातार भाजपा नेतृत्व के संपर्क में हैं। मगर समस्या संख्या बल का है। पायलट सिंधिया की तरह गहलोत सरकार को गिराने लायक जरूरी विधायक नहीं जुटा पाए। इस कारण भाजपा को अपनी रणनीति में बदलाव करना पड़ा है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि पायलट हर हाल में भाजपा के लिए लाभ का सौदा हैं। उनकी अपनी स्वजातीय गुर्जर बिरादरी में बेहतर पकड़ होने के साथ मीणा बिरादरी में भी अच्छी पैठ है। हालांकि अगर तत्काल पायलट को भाजपा में शामिल कराया गया तो उनके समेत उनके समर्थक विधायकों को इस्तीफा देना होगा। ऐसे में रणनीति है कि पायलट फिलहाल बगावती तेवर अपनाए रखें और अपने बारे में फैसला करने का मामला कांग्रेस के जिम्मे छोड़ दें।