भाजपा शासित राजस्थान और महाराष्ट्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी ‘आयुष्मान भारत-राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना’ को लागू करने में आनाकानी कर रहे हैं। एक अधिकारी ने बताया कि दोनों राज्यों में पहले से ऐसी ही स्वास्थ्य योजना लागू हैं। ऐसे में दोनों राज्य आयुष्मान भारत को लागू करने पर पसोपेश में हैं। आयुष्मान भारत के तहत हर परिवार को पांच लाख रुपये तक की स्वास्थ्य बीमा सुविधा देने की योजना है। इससे देश के करीब 10 करोड़ परिवारों को फायदा मिलेगा।
अधिकारी ने बताया कि राजस्थान सरकार ने केंद्र की योजना का स्वागत तो किया है, लेकिन इसे लागू करने के तरीके को लेकर सुनिश्चित नहीं है। दरअसल, राजस्थान में चल रही भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत 4.5 करोड़ लोगों को कैशलेस सुविधा दी जा मिल रही है।
अगले साल तक का है बीमा कंपनी से अनुबंध
राजस्थान में बीमा सुविधा दे रही कंपनी के साथ अगले साल तक का अनुबंध है। ऐसे में वसुंधरा सरकार यह नहीं समझ पा रही कि बिना किसी योजना को छेड़े बिना दोनों को एकसाथ कैसे लागू किया जाए। आयुष्मान भारत के सीईओ डॉ. इंदु भूषण ने शुक्रवार को राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे से इस मुद्दे पर चर्चा की थी।
महाराष्ट्र ने फंड की कमी का हवाला भी दिया
महाराष्ट्र में महात्मा ज्योतिबा फुले जन आरोग्य योजना के तहत 2.2 करोड़ लोगों को दो लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराया गया है। महाराष्ट्र ने आयुष्मान भारत को लागू नहीं कर पाने में फंड की कमी का हवाला भी दिया है। ओडिशा ‘बीजू स्वास्थ्य कल्याण योजना’ लागू होने के कारण पहले ही ‘आयुष्मान भारत’ को लागू करने से इनकार कर चुका है।
प. बंगाल असहमत लेकिन योजना करेगा लागू
पंजाब और दिल्ली ने अब तक योजना को लागू करने को लेकर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि, असहमत होने के बाद भी पश्चिम बंगाल सरकार ने योजना लागू करने को हामी भर दी है। अब तक 25 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने आयुष्मान योजना लागू करने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। मोदी सरकार 15 अगस्त से योजना को पूरे देश में लागू करना चाहती है।