लाइब्रेरी या पुस्तकालय, शब्द के साथ ही जहन में करीने से लगी किताबों की कतारों, पत्रिकाओं और अखबारों की तस्वीर उभरती है, लेकिन अगर लाइब्रेरी में किताबें ही न हों तो वह कैसी लाइब्रेरी, कैसा पुस्तकालय? लेकिन यह हकीकत है कि जयपुर सहित राजस्थान के कई शहरों में ऐसी बिना किताबों वाली लाइब्रेरी की संख्या तेजी से बढ़ी हैं।
खासकर उन इलाकों में जहां छात्र छात्राओं की संख्या अधिक है वहां ऐसी ढेरों लाइब्रेरी खुली हैं। ये जहां विद्यार्थियों के लिए एकाग्र होकर अध्ययन करने का ठिकाना बनी हैं वहीं परिचालकों के लिए चोखा धंधा साबित हो रही हैं।
दरअसल नयी पीढ़ी की ये लाइब्रेरी पारंपरिक पुस्तकालय जैसी नहीं होती जिनमें किताबों से भरे कमरे हों जहां शांति से बैठकर उन्हें पढा जा सके या पढने के लिए लिया जा सके। बल्कि ये नयी लाइब्रेरी सेल्फ स्टडी जोन के रूप में काम करती हैं जहां छात्र-छात्राएं अपनी-अपनी किताबें लेकर आते हैं वहां बैठकर पढ़ते हैं और वापस अपने घर, हास्टल या कमरे में चले जाते हैं। इन दिनों इस तरह की लाइब्रेरी का चलन जोर पकड़ रहा है और इनके लिए जरूरत होती है बस जगह की।
जयपुर में स्टडी प्वाइंट लाइब्रेरी चला रहे तारा अवाना कहते हैं, हम छात्र छात्राओं को शोर शराबे व चिल्लपों से दूर एक शांत वातावरण मुहैया करवाते हैं जहां बैठकर वह एकाग्रचित होकर अध्ययन कर सकते हैं। साथ ही उन्हें फ्री वाईफाई की सुविधा उपलब्ध रहती है जिससे वे अपने लैपटाप या टैब पर ऑनलाइन क्लासेज ले सकते हैं।