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Rajasthan: सीपी जोशी को प्रदेश अध्यक्ष बनाने के बाद इस तरह सधेंगे प्रदेश भाजपा के समीकरण, गुटबाजी बनेगी चुनौती

राहुल संपाल
Updated Thu, 23 Mar 2023 03:36 PM IST

सार

Rajasthan: चंद्र प्रकाश जोशी चित्तौड़गढ़ से दो बार लोकसभा पहुंचे हैं। 2014 में पहली बार चुने गए। इसके बाद 2019 में इस सीट से चुनाव जीते। 2014 के आम चुनाव में उन्होंने कांग्रेसी की वरिष्ठ नेता गिरिजा व्यास को हराया था। जोशी भाजपा के युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं...
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Rajasthan: सीपी जोशी - फोटो : Agency (File Photo)




एबीवीपी से राजनीतिक करियर की शुरुआत करने वाले सीपी जोशी संघ के नजदीक माने जाते हैं। 47 वर्षीय जोशी 58 साल के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया के मुकाबले युवा हैं। प्रदेश के सियासी जानकारों का कहना है कि पूनिया को राष्ट्रीय संगठन में जगह मिल सकती है। वहीं, अब नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति भी जल्द होने के आसार हैं। गुलाब चंद कटारिया के राज्यपाल बनाए जाने के बाद से यह पद खाली है। ऐसे में अब नेता प्रतिपक्ष गैर ब्राह्मण चेहरा होने के आसार हैं।

चंद्र प्रकाश जोशी चित्तौड़गढ़ से दो बार लोकसभा पहुंचे हैं। 2014 में पहली बार चुने गए। इसके बाद 2019 में इस सीट से चुनाव जीते। 2014 के आम चुनाव में उन्होंने कांग्रेसी की वरिष्ठ नेता गिरिजा व्यास को हराया था। जोशी भाजपा के युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। जोशी राजस्थान भाजपा के 15वें अध्यक्ष और 7वें ब्राह्मण अध्यक्ष हैं। प्रदेश में अध्यक्ष बदलने के बाद भाजपा के सामने अब नई प्रदेश कार्यकारिणी का गठन एक चुनौती होगी। हालांकि यह देखने वाली बात होगी कि जोशी पुरानी टीम के साथ मैदान में उतरते हैं या फिर नई टीम घोषित करते हैं। क्योंकि चुनाव में बहुत कम वक्त बचा है।

यह भी पढ़ें: Rajasthan: पीएम मोदी को राम बताने वाले जोशी प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा का ब्राह्मण चेहरे पर दाव, मेवाड़ भी साधा

खेमे की बात की जाए तो वसुंधरा राजे की सरकार के समय सीपी जोशी सांसद थे। उसके बाद सरकार चली गई। लेकिन जोशी दोबारा चित्तौड़गढ़ से सांसद बने। पूनिया के प्रदेशाध्यक्ष रहते भी कभी दोनों के बीच मनमुटाव जैसी कोई स्थिति देखने को नहीं मिली। जोशी को केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ का नजदीकी माना जाता है। राजस्थान से बाहर के नेताओं का हाथ भी जोशी को प्रदेश अध्यक्ष बनाने की लॉबिंग में रहा। मध्यप्रदेश से आने वाले एक वरिष्ठ नेता जो इन दिनों राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की टीम में अहम पद हैं, उनके और जोशी के बीच अच्छा तालमेल माना जाता है। ऐसे में संभावनाएं जताई जा रही है कि जोशी ने प्रदेश अध्यक्ष बनने के लिए उनकी मदद भी ली है।  

खेमेबाजी के बीच चुनौती भरा होगा कार्यकाल

प्रदेश के सियासी जानकारों का कहना है कि भाजपा ने इस बार भी नए चेहरे पर दांव लगाकर सबको चौंकाया है। इसके पहले भी भाजपा ने अशोक परनामी की जगह चुनावी साल में मदन लाल सैनी को प्रदेशाध्यक्ष बनाकर चौंकाया था। सैनी के देहांत के बाद सतीश पूनिया को प्रदेशाध्यक्ष के पद की जिम्मेदारी दी गई थी। केंद्र में सत्ता में आने के बाद भाजपा ने हर बार नए चेहरों को मौका देकर चौंकाने वाला ट्रेंड बरकरार रखा है। जोशी के सहारे भाजपा ने मेवाड़ क्षेत्र को साधने की कोशिश की है।

दरअसल, मेवाड़ ब्राह्मण और वैश्य बाहुल्य क्षेत्र है। यह भाजपा का बहुत बड़ा वोट बैंक है। भाजपा का उदयपुर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़ और बांसवाड़ा जिलों में ब्राह्मण और वैश्य वर्ग का खासा वोट बैंक है। गुलाबचंद कटारियों को राज्यपाल बनाए जाने के बाद से ही मेवाड़ क्षेत्र में पार्टी के पास को दमदार चेहरा नहीं रह गया था। इसलिए भाजपा ने जोशी को कमान सौंप एक तीर दो निशाने साधने की कोशिश की हैं। सीपी जोशी के लिए आने वाला समय चुनौती भरा रहेगा। पार्टी की गुटबाजी को खत्म करने की सबसे बड़ी चुनौती उनके सामने है। इसके बाद साल के आखिर में विधानसभा और अगले साल लोकसभा चुनाव हैं। ऐसे में गुटबाजी को खत्म करके भाजपा को जीत दिलाने की चुनौती उनके सामने रहेगी।

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