राजस्थान के उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट मीडिया से कोई बात नहीं कर रहे हैं। मीडिया फ्रेंडली पायलट दिल्ली में अज्ञात स्थान पर हैं। उनके समर्थन में डेढ़ दर्जन विधायकों ने मानेसर,गुडग़ांव में डेरा डाल दिया है। पीआर मीणा, चेतन डूडी, राजेन्द्र विधूड़ी, दानिश अबरार भी कहां हैं किसी को खबर नहीं है।
राजस्थान सरकार के करीब दस मंत्रियों की इच्छा है कि राज्य की कमान अब पायलट संभाले। कुछ निर्दल विधायक भी पायलट के साथ हैं। कल अशोक गहलोत द्वारा बुलाई गई बैठक में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बीडी कल्ला, विश्वेंदर सिंह रमेश मीणा समेत तीन विधायक मौजूद नहीं थे। सचिन पायलट के होने का सवाल ही नहीं था।
सचिन पायलट अहमद पटेल से मिल चुके हैं। वह ज्योतिरादित्य सिंधिया नहीं बनना चाहते। उनकी टीम के एक विधायक का कहना है कि पायलट को ज्योतिरादित्य सिंधिया बनाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। सूत्र का कहना है कि राजस्थान में चुनाव में मिली सफलता के बाद कांग्रेस पार्टी के तत्कालीन अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक वादा किया था। उसे उन्हें और पार्टी की वर्तमान अध्यक्ष को निभाना चाहिए।
कपिल सिब्बल का दर्द सुनिए?
कपिल सिब्बल 90 के दशक से कानूनी मामलों में पार्टी के तारणहार हैं। पूर्व केन्द्रीय मंत्री हैं। उन्हें भी राजस्थान के घटनाक्रम पर पीड़ा हो रही है। कपिल सिब्बल ने कहा कि वह पार्टी की स्थिति को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि क्या घोड़ो के अस्तबल से भागने के बाद चेतेंगे हम? उनका यह ट्वीट काफी वायरल हो रहा है।
सिब्बल का ईशारा सचिन पायलट की तरफ है। वह यहां ज्योतिरादित्य सिंधिया को टारगेट करके बोल रहे हैं। कपिल सिब्बल कहना चाहते हैं कि घोड़े अस्तबल से क्यों भाग रहे हैं? वह कहना चाहते हैं कि पार्टी संगठन की कमजोरी के कारण पैदा हुए हालात ने सिंधिया को कांग्रेस छोडऩे पर मजबूर किया। वह भाजपा में चले गए, कांग्रेस की सरकार गिर गई। क्या यही राजस्थान में चाहते हैं?
यह एक बड़ा सवाल है। तमिलनाडु से लेकर कन्याकुमारी तक कुछ ऐसा ही है। सूत्र बताते हैं कि महाराष्ट्र में भी कांग्रेस पार्टी की अंदरुनी स्थिति ठीक नहीं है। पृथ्वीराज चौह्वाण भी काफी दु:खी हैं। अशोक चह्वाण अपनी राह पर चल रहे हैं। कांग्रेस के युवा नेताओं को भी माजरा कम समझ में आ रहा है।
मध्यप्रदेश में कांग्रेस कमलनाथ, दिग्विजय के फेर में एक बड़ी टूट झेल चुकी है। इससे पहले कर्नाटक में भी पार्टी संगठनिक कमजोरी और तालमेल के चलते टूटी। दर्जन भर से अधिक विधायक बागी हो गए और एचडी कुमारस्वामी सरकार गिर गई। उत्तराखंड में भी यही हुआ था।
पश्चिम बंगाल में पार्टी की संगठनात्मक स्थिति को लेकर वरिष्ठ नेताओं में घमासान थम नहीं आ रहा है। यूपी में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी की सक्रियता के बाद भी तमाम पुराने, अनुभवी नेता तथा युवा नेताओं के बीच में तालमेल की कमी महसूस हो रही है।
राजस्थान में राज्य सरकार के गठन के बाद से ही टकराव की स्थिति बनी है। बताते हैं इस पूरे टकराव का मुख्य कारण बुड्ढे वरिष्ठ नेताओं और युवा नेताओं में तालमेल का न बन पाना है। वरिष्ठ नेता जहां कुछ छोडऩे को तैयार नहीं है, वहीं युवा नेता अपना सम्मान, हक पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।