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राजस्थान: सचिन पायलट को कटी पतंग बना देने पर क्यों अमादा हैं अशोक गहलोत?

Sun, 12 Jul 2020 04:45 PM IST
मुकेश कुमार झा शशिधर पाठक, नई दिल्ली

सार

  • बड़ा सवाल-क्या बुड्ढे कांग्रेसियों के मकडजाल में फंस गई है पार्टी?
  • अहमद पटेल से मिलने के बाद भी सचिन पायलट की कम नहीं हुई परेशानी
  • 10 मंत्री, 15 विधायक पायलट के साथ, नया अलजेब्रा गढ़ रहे हैं गहलोत
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अशोक गहलोत-सचिन पायलट (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
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विस्तार
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कांग्रेस पार्टी के जिन नेताओं ने अशोक गहलोत को राजस्थान का मुख्यमंत्री बनवाया था, गहलोत को अपने तिकड़म के सहारे उन पर पूरा भरोसा है। वह उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट को कटी पतंग बना देने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। गहलोत और विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी में अच्छी निभ रही है।

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मुख्यमंत्री चाहते हैं कि सीपी जोशी की सरकार में भूमिका बढ़े। गहलोत के हर बुने जाल पर सचिन पायलट बेहद संवेदनशील हैं। वह शुक्रवार की रात से दिल्ली में हैं। राजस्थान सरकार के कई मंत्री भी हैं। पायलट सिंधिया वाली गलती दोहराना नहीं चाहते, खामोशी से कांग्रेस अध्यक्ष और राहुल गांधी के मार्गदर्शन का इंतजार कर रहे हैं। पायलट जयपुर से तय करके निकले हैं कि लड़ाई अब आर या पार हो जाए।



जयपुर में गहलोत की चक्रव्यूह रचना

  1. अशोक गहलोत की ब्यूह रचना पिछले तीन-चार दिन से तेजी से चल रही है। वह सीपी जोशी, अविनाश पांडे समेत अन्य नेताओं के सहारे किलेबंदी कर रहे हैं। शनिवार रात 9.40 उन्होंने विधायकों की बैठक बुलाई थी। उनके आवास पर बैठक देर रात तक चली। शनिवार को पूरे दिन वह विधायकों की संख्या, समर्थन, साथ देने वाले लोगों की अलग-अलग सूची बनाते रहे। गहलोत की टीम के एक सदस्य की माने तो पायलट को गहलोत के साथ ही काम करना होगा। इसके अलावा कोई चारा नहीं है। मुख्यमंत्री गहलोत रविवार को सुबह से ही सक्रिय हैं। उनके पक्ष में एक अच्छी बात यह जाती है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा गहलोत के प्रति थोड़ा साफ्ट कार्नर रखती है।
  2. अशोक गहलोत का खेमा सचिन पायलट से अध्यक्ष का पद छीनना चाहता है। इसका काफी दबाव बनाया जा रहा है। सचिन पायलट इस स्थिति के लिए बिल्कुल तैयार नहीं है। राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए महेश जोशी, रघु शर्मा, महिला और जाट नेता के तौर पर ज्योति मिर्धा,लालचंद कटारिया का नाम लिया जा रहा है। रघुबीर मीणा भी दौड़ में हैं। नाम सीपी जोशी का भी चल रहा है। इसके अलावा गहलोत की टीम गुर्जर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला को अपने पक्ष में करके गुर्जर समाज को साधने का संदेश दे रही है।
  3. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शुक्रवार से ही व्यूह रचना शुरू कर दी है। राजस्थान पुलिस का स्पेशल आपरेशन ग्रुप एजीडी राठोर की अगुआई में राज्य सरकार को अपदस्थ करने के मामले की जांच कर रहा है। उसने दो निर्दल, एक कांग्रेस विधायक को अपने राडार पर लिया है। मामले में बयान दर्ज करने के लिए अशोक गहलोत और सचिन पायलट दोनों का समय मांगा है। राजस्थान पुलिस का एंटी करप्शन ब्यूरो भी मामला दर्ज करके तीन नेताओं के खिलाफ मामला दर्ज कर चुका है। दो भाजपा नेता हार्स ट्रेडिंग के प्रयास में गिरफ्तार भी हो चुके हैं।
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राहुल गांधी निभाएं अपना वादा, कांग्रेस दे काम का सम्मान- सचिन पायलट

राजस्थान के उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट मीडिया से कोई बात नहीं कर रहे हैं। मीडिया फ्रेंडली पायलट दिल्ली में अज्ञात स्थान पर हैं। उनके समर्थन में डेढ़ दर्जन विधायकों ने मानेसर,गुडग़ांव में डेरा डाल दिया है। पीआर मीणा, चेतन डूडी, राजेन्द्र विधूड़ी, दानिश अबरार भी कहां हैं किसी को खबर नहीं है।

राजस्थान सरकार के करीब दस मंत्रियों की इच्छा है कि राज्य की कमान अब पायलट संभाले। कुछ निर्दल विधायक भी पायलट के साथ हैं। कल अशोक गहलोत द्वारा बुलाई गई बैठक में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बीडी कल्ला, विश्वेंदर सिंह रमेश मीणा समेत तीन विधायक मौजूद नहीं थे। सचिन पायलट के होने का सवाल ही नहीं था।

सचिन पायलट अहमद पटेल से मिल चुके हैं। वह ज्योतिरादित्य सिंधिया नहीं बनना चाहते। उनकी टीम के एक विधायक का कहना है कि पायलट को ज्योतिरादित्य सिंधिया बनाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। सूत्र का कहना है कि राजस्थान में चुनाव में मिली सफलता के बाद कांग्रेस पार्टी के तत्कालीन अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक वादा किया था। उसे उन्हें और पार्टी की वर्तमान अध्यक्ष को निभाना चाहिए।

कपिल सिब्बल का दर्द सुनिए?
कपिल सिब्बल 90 के दशक से कानूनी मामलों में पार्टी के तारणहार हैं। पूर्व केन्द्रीय मंत्री हैं। उन्हें भी राजस्थान के घटनाक्रम पर पीड़ा हो रही है। कपिल सिब्बल ने कहा कि वह पार्टी की स्थिति को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि क्या घोड़ो के अस्तबल से भागने के बाद चेतेंगे हम? उनका यह ट्वीट काफी वायरल हो रहा है।

सिब्बल का ईशारा सचिन पायलट की तरफ है। वह यहां ज्योतिरादित्य सिंधिया को टारगेट करके बोल रहे हैं। कपिल सिब्बल कहना चाहते हैं कि घोड़े अस्तबल से क्यों भाग रहे हैं? वह कहना चाहते हैं कि पार्टी संगठन की कमजोरी के कारण पैदा हुए हालात ने सिंधिया को कांग्रेस छोडऩे पर मजबूर किया। वह भाजपा में चले गए, कांग्रेस की सरकार गिर गई। क्या यही राजस्थान में चाहते हैं?
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क्या बुड्ढों के मकडजाल में फंस गई है कांग्रेस?

यह एक बड़ा सवाल है। तमिलनाडु से लेकर कन्याकुमारी तक कुछ ऐसा ही है। सूत्र बताते हैं कि महाराष्ट्र में भी कांग्रेस पार्टी की अंदरुनी स्थिति ठीक नहीं है। पृथ्वीराज चौह्वाण भी काफी दु:खी हैं। अशोक चह्वाण अपनी राह पर चल रहे हैं। कांग्रेस के युवा नेताओं को भी माजरा कम समझ में आ रहा है।

मध्यप्रदेश में कांग्रेस कमलनाथ, दिग्विजय के फेर में एक बड़ी टूट झेल चुकी है। इससे पहले कर्नाटक में भी पार्टी संगठनिक कमजोरी और तालमेल के चलते टूटी। दर्जन भर से अधिक विधायक बागी हो गए और एचडी कुमारस्वामी सरकार गिर गई। उत्तराखंड में भी यही हुआ था।

पश्चिम बंगाल में पार्टी की संगठनात्मक स्थिति को लेकर वरिष्ठ नेताओं में घमासान थम नहीं आ रहा है। यूपी में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी की सक्रियता के बाद भी तमाम पुराने, अनुभवी नेता तथा युवा नेताओं के बीच में तालमेल की कमी महसूस हो रही है।

राजस्थान में राज्य सरकार के गठन के बाद से ही टकराव की स्थिति बनी है। बताते हैं इस पूरे टकराव का मुख्य कारण बुड्ढे वरिष्ठ नेताओं और युवा नेताओं में तालमेल का न बन पाना है। वरिष्ठ नेता जहां कुछ छोडऩे को तैयार नहीं है, वहीं युवा नेता अपना सम्मान, हक पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
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