Rajasthan By Election: भाजपा ने 5 सीटों (झुंझुनूं, खींवसर, देवली-उनियारा, सलूंबर, रामगढ़) पर जीत दर्ज की। जबकि कांग्रेस दौसा और एक सीट (चौरासी) पर भारतीय आदिवासी पार्टी BAP ने जीत हासिल की है।
राजस्थान में सात विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के परिणाम शनिवार को आ गए। राज्य की सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी ने इन चुनावों में दमदार प्रदर्शन किया हैं। पार्टी ने सात में से 5 सीटों पर जीत हासिल की है। यह उपचुनाव प्रदेश के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और उनकी सरकार की नीतियों का पहला टेस्ट था। इसे न केवल भजनलाल सरकार ने पास किया बल्कि जीत एक नया रिकॉर्ड भी कायम किया है। इन सातों सीटों पर चुनाव प्रचार की कमान खुद सीएम ने संभाली हुई थी। जबकि कांग्रेस की तरफ से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ही प्रचार की कमान संभाले हुए थे। क्योंकि पूर्व सीएम अशोक गहलोत और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट महाराष्ट्र चुनाव में व्यस्त थे। दोनों नेता इस उपचुनाव में कम सक्रिय दिखे।
विज्ञापन
भाजपा ने 5 सीटों (झुंझुनूं, खींवसर, देवली-उनियारा, सलूंबर, रामगढ़) पर जीत दर्ज की। जबकि कांग्रेस दौसा और एक सीट (चौरासी) पर भारतीय आदिवासी पार्टी BAP ने जीत हासिल की है। दौसा सीट पर मंंत्री किरोड़ीलाल मीणा के भाई जगमोहन मीणा को हार का सामना करना पड़ा। किरोड़ी ने लोकसभा चुनाव में भी भाई को टिकट दिलाने की कोशिश की थी। जबकि चौरासी विधानसभा सीट से भारतीय आदिवासी पार्टी प्रत्याशी अनिल कुमार कटारा ने बाजी मारी है।
खींवसर में आरएलपी सांसद हनुमान बेनीवाल की पत्नी कनिका बेनीवाल की हार हुई। खींवसर से भाजपा के रेवंतराम डांगा ने जीत दर्ज की है। आरएलपी की हार के बाद उसके पास राजस्थान में एक भी विधायक नहीं बचा। थप्पड़ कांड से चर्चा में आई देवली-उनियारा सीट पर निर्दलीय नरेश मीणा दूसरे और कांग्रेस के केसी मीणा तीसरे नंबर पर रहे। नरेश मीणा ने ही एसडीएम को थप्पड़ मारा था। इस सी से भाजपा के राजेंद्र गुर्जर ने जीत हासिल की।
विज्ञापन
झुंझुनूं में कांग्रेस सांसद बृजेंद्र ओला के बेटे अमित ओला को हार का सामना करना पड़ा है। इस पर भाजपा के राजेंद्र भांबू ने जीत दर्ज की है। इस सीट पर कांग्रेस ने 21 साल बाद हार का स्वाद चखा है। इससे पहले 2003 में सुमित्रा सिंह यहां से जीती थीं। इसके बाद से यह सीट कांग्रेस के कब्जे में है। यह झुंझुनूं के इतिहास की सबसे बड़ी जीत है। जबकि सलूंबर विधानसभा क्षेत्र के आखिरी राउंड में बाजी पलट गई और भाजपा की शांता मीणा ने जीत दर्ज की। शांता ने बीएपी प्रत्याशी जितेश कुमार कटारा को शिकस्त दी है। जबकि दौसा विधानसभा सीट से कांग्रेस के दीनदयाल बैरवा, रामगढ़ से भाजपा के सुखवंत सिंह ने जीत हासिल की है।
सीएम ने खुद संभाली कमान, गहलोत-पायलट नहीं दिखे सक्रिय!
इन उपचुनावों में सातों सीटों पर प्रचार की जिम्मेदारी खुद सीएम भजनलाल ने अपने हाथों में ले रखी थी। इस सीटों पर प्रचार में उनकी अहम भूमिका रही। उन्होंने हर सीट पर कई रैलियां की और प्रत्याशी के समर्थन में जनसंपर्क भी किया। लेकिन कांग्रेस की तरफ से पूर्व सीएम अशोक गहलोत और सचिन पायलट चुनाव में कम सक्रिय दिखे। कांग्रेस हाईकमान ने इन दोनों नेताओं को महाराष्ट्र चुनाव की जिम्मेदारी सौंपी थी। गहलोत को बतौर सीनियर ऑब्जर्वर मुंबई और कोंकण संभाग का जिम्मा दिया गया था। जबकि पायलट को मराठवाड़ा संभाग का सीनियर ऑब्जर्वर बनाए गया था। इसलिए इन दोनों नेताओं ने उप चुनावों में कम सक्रियता दिखाई। दौसा,देवली उनियारा और झुंझुनू विधानसभा पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के प्रभाव वाली सीट मानी जाती है। इन सीटों से जीते कांग्रेस के विधायक सांसद बन गए है। इसलिए इन सीटों पर उपचुनाव हुए थे। उपचुनाव वाली सात सीटों पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ही प्रचार करते हुए नजर आए।