श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के बेटे नमल राजपक्षे को आज श्रीलंका के उच्च न्यायालय ने 2015 से पहले भारतीय निवेश से कथित हेराफेरी के मामले में दोषी ठहराया। साथ ही उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया। हालांकि राजपक्षे ने इस फैसले को सरकारी की साजिश बताया है।
श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के बेटे नमल राजपक्षे की मुश्किले बढ़ती हुई दिख रही है। जहां मंगलवार को श्रीलंका के उच्च न्यायालय ने 2015 से पहले भारतीय निवेश से कथित हेराफेरी के मामले में दोषी ठहराया। साथ ही जमानत पर रिहा कर दिया। बता दें कि श्रीलंका पोदुजना पेरामुना (एसएलपीपी) के नेता नमल राजपक्षे, राजपक्षे परिवार के एकमात्र सदस्य हैं जो अब संसद के सदस्य हैं।
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कोर्ट के फैसले पर बोले राजपक्षे
फैसले के बाद नमल राजपक्षे ने आरोप लगाया है कि उन्हें राजनीतिक रूप से निशाना बनाया जा रहा है। यह मामला 2016 में रग्बी खेल को विकसित करने के लिए क्रिश होटल परियोजना से 70 मिलियन श्रीलंकाई रुपये के कथित दुरुपयोग से जुड़ा हुआ है। नमल राजपक्षे को जून 2016 में गिरफ्तार किया गया था। वह स्वयं श्रीलंका के अंतरराष्ट्रीय रग्बी खिलाड़ी रहे हैं।
नई एनपीपी सरकार ने मामले को फिर से दी तूल
मामले में नई एनपीपी सरकार ने 2016 में रुके हुए इस मामले को फिर से खड़ा किया, जिसके बाद पुलिस ने नमल राजपक्षे से पूछताछ की। जहां एक सप्ताह बाद, उनके छोटे भाई योशिता राजपक्षे को भी इसी तरह के आरोपों में गिरफ्तार किया गया। इस मामले में योशिता भी अभियुक्त हैं। साथ ही एनपीपी सरकार का कहना है कि वह न्याय दिलाने के लिए सभी रुके हुए मामलों को पुनर्जीवित करेगी, जबकि राजपक्षे परिवार इसे राजनीतिक षडयंत्र मानता है। इस मामले की अगली सुनवाई 27 मार्च को होगी।
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एक नजर पूरे मामले पर
गौरतलब है कि यह मामला 2016 में शुरू हुआ था, जब नमल राजपक्षे पर आरोप लगा था कि उन्होंने रग्बी खेल को बढ़ावा देने के लिए क्रिश होटल परियोजना से 70 मिलियन श्रीलंकाई रुपये का कथित रूप से दुरुपयोग किया था। वह श्रीलंका के अंतरराष्ट्रीय रग्बी खिलाड़ी रह चुके हैं। क्रिश होटल परियोजना को रद्द कर दिया गया था, और इसकी निर्माण कार्य अधूरा पड़ा हुआ है।