करीब एक महीने तक चले महाराष्ट्र के महाभारत में हमें कई किरदार देखने को मिले। कभी शिव सेना, एनसीपी के किसी नेता ने मोर्चा संभाला, तो कभी भाजपा ने। कांग्रेस का भी कोई न कोई किरदार सियासी ड्रामे के पटल पर आता रहा। मगर एक व्यक्ति इस दौरान कहीं भी नहीं दिखा।
वह शख्स हैं राज ठाकरे। बाला साहेब ठाकरे के भतीजे राज ठाकरे कई साल पहले परिवार से अलग राह चुन चुके हैं। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना मनसे के नाम से नई पार्टी भी बनाई। हालांकि परिवार से अलग होने के बाद वह ज्यादा चमक नहीं बिखेर सके और इस बार चुनावों में महज एक सीट ही जीत सके।
एक महीने से ज्यादा चले घटनाक्रम में राज ठाकरे या महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना की ओर से कहीं कोई बयान नहीं आया और न ही राज ठाकरे कहीं नजर आए। मगर गुरुवार को अपने चचेरे भाई उद्धव ठाकरे की शपथ ग्रहण समारोह में वह मंच पर प्रमुख नेताओं के साथ नजर आए। वह शिव सेना के वरिष्ठ नेता मनोहर जोशी के साथ गर्मजोशी के साथ बात करते भी दिखे। राज ठाकरे की मंच पर मौजूदगी से अटकलें लगने लगी हैं कि क्या पवार परिवार के बाद ठाकरे परिवार भी फिर से एक हो सकता है।
शिव सेना के संस्थापक बाल ठाकरे को अपने ही भतीजे राज ठाकरे की बगावत देखनी पड़ी। 2006 में चाचा-भतीजे आमने सामने हो गए। राज ठाकरे को बाला साहेब द्वारा उद्धव को आगे बढ़ाना रास नहीं आया। उन्होंने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना नाम से अपनी पार्टी बना ली और 2009 विधानसभा चुनाव में 13 सीट जीत लीं। मगर जल्द ही उन्होंने अपनी चमक खोनी शुरू कर दी।