विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को कहा कि हिंद-प्रशांत सहयोग की तामीर एक ज्यादा समकालीन दुनिया की झलक देती है। साथ ही यह शीतयुद्ध से उबरने और इसे दोबारा मजबूत नहीं करने को भी प्रतिबिंबित करता है। विदेश मंत्री का यह बयान पिछले महीने रूस के विदेश मंत्री और बुधवार को ही भारत में रूस के राजदूत की तरफ से हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर गठित भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के क्वाड समूह पर की गई टिप्पणियों का जवाब माना जा रहा है।
रूस क्वाड का बड़ा आलोचक है। दिल्ली पहुंचे रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लवरोव ने इस संगठन के लिए ‘एशियाई नाटो’ शब्द का उपयोग किया था, जबकि बुधवार को रूसी राजदूत निकोलाय कुदाशेव ने पश्चिमी देशों की हिंद-प्रशांत रणनीति को बेहद खतरनाक बताते हुए इसे शीत युद्ध को दोबारा जिंदा करने की कोशिश बताया।
रायसीना वार्ता के दौरान अपने फ्रांसीसी और ऑस्ट्रेलियाई समकक्षों के साथ वर्चुअल बातचीत में विदेश मंत्री जयशंकर ने क्वाड समूह के आलोचकों पर पलटवार किया। उन्होंने कहा, क्वाड के बारे में ‘एशियाई नाटो’ जैसे शब्दों का उपयोग ऐसा कहने वालों के एक दिमागी खेल का हिस्सा है। एक साथ आने का मकसद हमारा अपने राष्ट्रीय, क्षेत्रीय व वैश्विक हितों के लिए काम करने की राह तलाशना है।
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, नाटो सरीखी मानसिकता भारत में कभी नहीं रही। यदि यह एशिया में पहले रही हो, तो भी यह मेरे देश में नहीं बल्कि अन्य देशों और क्षेत्रों में थी। उन्होंने कहा कि हिंद-प्रशांत का मतलब एक ऐसी निर्बाध दुनिया है, जो एतिहासिक रूप से भारत-अरब आर्थिक-व्यापारिक संबंधों और वियतनाम व चीन के पूर्वी तट जैसे आसियान देशों के सांस्कृतिक प्रभावों के रूप में मौजूद थी।
उन्होंने कहा, मैं कहूंगा कि यह एक तरह से हिंद-प्रशांत इतिहास की तरफ वापसी है। यह अधिक सामयिक दुनिया को प्रदर्शित करता है। यह शीत युद्ध से उबरने जैसा है और उसे थोपता नहीं है। उन्होंने कहा, मुझे उम्मीद है कि समकालीन विदेश नीति चला रहे हम सभी लोग इस नजरिये से देखेंगे।
उन्होंने कहा, क्वाड में होने वाली चर्चाओं में टीका सहयोग, जलवायु से जुड़ी लड़ाई, उभरती हुई तकनीकें, लचीली आपूर्ति श्रृंखला, आतंकवाद से लड़ाई और समुद्री सुरक्षा सहयोग आदि शामिल हैं। इस सूची से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि हमारे दिमाग में क्या है और जो हम करने की कोशिश कर रहे हैं, उसका मकसद क्या है।
मलक्का और अदन के बीच नहीं फंसा रहेगा भारत
विदेश मंत्री ने कहा, हिंद-प्रशांत इस बात का स्पष्ट संदेश है कि भारत मलक्का जलडमरूमध्य और अदन की खाड़ी के बीच ही नहीं फंसा रहेगा, क्योंकि देश के हित, प्रभाव और गतिविधियां इससे कहीं आगे तक हैं।
भारत कर रहा है म्यांमार समस्या हल कराने की कोशिश
रायसीना वार्ता के दौरान ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री मैरिसे पाएने ने म्यांमार के हालातों को बेहद चुनौतीपूर्ण बताया। उन्होंने कहा, यह देश में लंबे समय से लोकतात्रिक बदलावों के लिए मेहनत कर रहे लोगों के लिए बेहद दुखद है। इस पर विदेश मंत्री जयशंकर ने भी म्यांमार के हालातों का हल तलाशने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा, हम म्यांमार में सभी पक्षों के साथ बेहद गहराई से जुड़े हुए हैं। हम इस मुद्दे पर आसियान देशों के साथ भी संपर्क में हैं। हम सभी को इस समस्या का सामान्य हल तलाशने के लिए एक साथ आने के तरीके तलाशने होंगे। फ्रांसीसी विदेश मंत्री जीन-वेस ली ड्रियान ने कहा, 27 देशों के यूरोपीय संघ ने म्यांमार की सेना के मुख्य अधिकारियों के खिलाफ प्रतिबंध स्वीकार कर लिए हैं और उनके यूरोप की यात्रा करने पर प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं।