अपने नेटवर्क को 5जी सेवाओं से सुसज्जित करने की योजना बना रहे रेल मंत्रालय को दूरसंचार मंत्रालय ने झटका दे दिया है। दूरसंचार मंत्रालय ने न्यायिक आदेशों का हवाला देकर करीब 1 लाख करोड़ रुपये की शुरुआती कीमत वाला 5जी स्पेक्ट्रम मुफ्त में देने से इनकार कर दिया है।
दूरसंचार मंत्रालय का कहना है कि रेलवे को इसके लिए नीलामी प्रक्रिया में भाग लेना होगा। बता दें कि रेल मंत्रालय ने गत दिसबंबर में यात्रियों की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी नेटवर्क स्थापित करने और स्टेशनों व ट्रेन में वाई-फाई मुहैया कराने के लिए 5जी स्पेक्ट्रम मांग रखी थी।
दूरसंचार विभाग के मुताबिक, सरकार के पास वर्तमान में मौजूद 5जी स्पेक्ट्रम से देश की आधी आबादी को दूरसंचार सेवाएं मुहैया करायी जा सकती हैं। रेलवे स्पेक्ट्रम का व्यवसायिक इस्तेमाल करेगी, इसलिए उसे निशुल्क स्पेक्ट्रम मुहैया कराने से नीलामी की कतार में खड़ी दूरसंचार कंपनियों को इससे वंचित करना पड़ेगा।
गौरतलब है कि 5जी पर दूरसंचार मंत्रालय रूपरेखा तैयार कर चुका है और निजी क्षेत्र की कंपनियों को स्पेक्ट्रम मुहैया कराने की नीति पर आगे काम चल रहा है। लेकिन बिना 5जी के रेलवे की पूरी योजना महज कागजी दस्तावेज बनकर रह जाएगी, जो सरकारी विभाग होने के नाते बिना प्रक्रिया के स्पेक्ट्रम हासिल हो जाना तय मानकर चल रहा था। अब देखना है कि दो मंत्रालयों के बीच प्रक्रिया की रस्साकसी से सरकार कैसे निपटती है।