फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सबसे ज्यादा सवाल और चर्चाओं में भाग लेने वाले वनमैन आर्मी हैं प्रेमचंद्रन

Sun, 06 Jan 2019 03:26 AM IST
गौरव द्विवेदी शरद गुप्ता, नई दिल्ली
विज्ञापन
N. K. Premachandran
विज्ञापन
वह अपनी पार्टी के अकेले सांसद हैं लेकिन फिर भी एनके प्रेमचंद्रन की गिनती लोकसभा में सबसे सक्त्रिस्य सांसदों में होती है। वे लगभग हर बहस में हिस्सा लेते हैं और सबसे ज्यादा सवाल पूछने वालों में उनका शुमार होता है। उनके कई प्रतिद्वंद्वी पार्टियों के सांसद उन्हें ‘वन मैन आर्मी’ की संज्ञा देते हैं।
विज्ञापन


प्रेमचंद्रन केरल की कोल्लम सीट से रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) से चुने गए हैं। पिछले साढे चार सालों के दौरान उन्होंने 313 चर्चाओं में हिस्सा लिया है और 454 सवाल पूछे हैं। वे लोकसभा में न केवल सबसे ज्यादा चर्चाओं में हिस्सा लेते हैं बल्कि बेहतर तर्कों और तथ्यों के साथ अपनी बात रखते हैं। इसी वजह से उनके विरोधी भी उनका आदर करते हैं।

प्रेमचंद्रन कहते हैं कि दूसरे सांसद अक्सर मुझसे पूछते हैं कि 543 सदस्यों वाली लोकसभा में सबसे छोटी पार्टी का प्रतिनिधित्व करने के बावजूद आपको सबसे ज्यादा बोलने का अवसर कैसे मिल जाता है? उनका जवाब होता है लोकसभा संचालन के नियम और प्रक्त्रिस्या की पूरी जानकारी होने से ही वे हर चर्चा में भाग ले पाते हैं। वे कहते हैं, किसी विषय पर स्टैट्यूटरी रिज़ोल्यूशन (वैधानिक प्रस्ताव) पेश करने वाले को 15 मिनट तक बोलने का अवसर मिलता है। मैं इसी तरह के नियमों का लाभ उठाता हूं।
विज्ञापन


पेशे से दीवानी मामलों के वकील होना प्रेमचंद्रन के लिए एक बड़ा लाभ है। उनका कहना है कि किसी भी बिल को पढ़ते ही मुझे तुरंत समझ आ जाता है कि आम नागरिक इससे कैसे प्रभावित होने वाला है। उसी के अनुसार मैं तथ्य और तर्क जुटाता हूं। इसके लिए मुझे किसी असिस्टेंट के बजाय संसद के पुस्तकालय के रिसर्च और रेफेरेंस (शोध और संदर्भ) विंग से ज्यादा मदद मिलती है।
विज्ञापन

बराबरी की टक्कर

प्रेमचंद्रन ने अपना राजनीतिक जीवन ग्राम पंचायत का चुनाव जीतकर किया था। उसके बाद वे कोल्लम जिला पंचायत का चुनाव जीते। फिर विधायक बने। उसके बाद 1996 और 1998 में लोकसभा का चुनाव जीते लेकिन दोनों बार महज डेढ-डेढ साल बाद ही लोकसभा भंग कर दी गई। 

2000 में राज्यसभा में अपनी पार्टी का प्रतिनिधित्व किया और 2006 में फिर विधानसभा पहुंच कर वाम मोर्चे की सरकार में मंत्री रहे। लेकिन जब 2014 के चुनाव में माकपा ने कोल्लम से अपना उम्मीदवार उतारने का फैसला किया तो उनकी पार्टी ने वाम मोर्चे के बजाए कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ़ की ओर से चुनाव लड़ा और जीता। वे कहते हैं - यूं तो यह लोकसभा में मेरा तीसरा कार्यकाल है लेकिन पांच साल का कार्यकाल पहली बार पूरा कर रहा हूं।

उनके प्रदर्शन को न सिर्फ उनके सहयोगी सांसद बल्कि लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन भी सराहती हैं और अक्सर दूसरे सांसदों को प्रेमचंद्रन से सीखने की हिदायत भी देती हैं। बल्कि राज्यसभा के सभापति एम वेंकैय्या नायडू ने हाल ही में अपनी जर्मनी की यात्रा के दौरान प्रेमचंद्रन की कार्यशैली की तारीफ की। उन्हें कई निजी संस्थानों ने बेस्ट पार्लियामेंटरियन के ख़िताब से नवाज़ा है।

प्रेमचंद्रन जैसा प्रदर्शन भाजपा के निशिकांत दुबे (355 चर्चाओं में हिस्सा और 669 सवाल) और तृणमूल कांग्रेस के सौगत रॉय (234 चर्चाएँ और 557 प्रश्न) का भी है जबकि वे दोनों कहीं बड़ी पार्टियों का प्रतिनिधित्व करते हैं, अनुभव में कहीं ज्यादा है और ज्यादा हाई-प्रोफ़ाइल सांसद माने जाते हैं। 
 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें