फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कोरोना से बचाव के लिए रेलवे ने हर नॉन एसी कोच पर तीन तो एसी कोच पर खर्च किए छह लाख

Tue, 21 Jul 2020 09:33 PM IST
गौरव पाण्डेय पीटीआई, नई दिल्ली
विज्ञापन
भारतीय रेलवे - फोटो : Shutterstock
विज्ञापन

रेलवे ने विशेष रूप से तैयार किए गए डिब्बों में कोविड-19 महामारी के दौरान और बाद में यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रति गैर-वातानुकूलित (नॉन एसी)  डिब्बे के लिए तीन लाख रुपये और प्रति वातानुकूलित डिब्बे पर छह लाख रुपये खर्च किए हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

विज्ञापन


रेल कोच कारखाना (आरसीएफ) कपूरथला ने दो ऐसे डिब्बों का निर्माण किया है जिनमें पैर से संचालित होने वाले वॉशबेसिन, डिस्पेंसर और शौचालय फ्लश जैसी सुविधाएं हैं। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए दरवाजे के हैंडल पर ‘एंटी-माइक्रोबियल कॉपर’ का इस्तेमाल किया गया है।

आरसीएफ के महाप्रबंधक रवींद्र गुप्ता ने कहा, 'टाइटेनियम ऑक्साइड कोटिंग, जिसमें सभी सतहों को शामिल किया गया है, प्रति कोच लगभग 2.5 लाख रुपये और प्लाज्मा आयन प्रणाली की लागत लगभग तीन लाख रुपये से 3.5 लाख रुपये प्रति कोच है।'
विज्ञापन


उन्होंने बताया कि कुल मिलाकर, गैर-वातानुकूलित डिब्बे के लिए हमने 2.5 लाख से तीन लाख रुपये खर्च किए हैं और वातानुकूलित डिब्बे के लिए हमने पांच से छह लाख रुपये खर्च किए हैं।

पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) द्वारा आयोजित एक वेबिनार में गुप्ता ने कहा कि रेलवे ऐसे उपाय तलाशने के लिए आंतरिक शोध कर रहा था जो ऐसे डिब्बों के निर्माण की लागत को कम कर सकता है। 

उन्होंने कहा कि रेलवे को इन डिब्बों में दिलचस्पी पैदा हुई है और रेलवे बोर्ड से मंजूरी मिलते ही आरसीएफ ऐसे कई डिब्बों का निर्माण करने के लिए तैयार है। गुप्ता ने कहा कि पहले दो डिब्बे, एक वातानुकूलित और दूसरा गैर-वातानुकूलित, वर्तमान में उत्तर पश्चिम मध्य रेलवे जोन के लिए हैं।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें