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Railways: 'रेलवे को किराया घटाकर बर्थ की अधिकतम बुकिंग पर ध्यान देना चाहिए', संसद की लोक लेखा समिति की सिफारिश

Fri, 21 Mar 2025 09:33 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

संसद की लोक लेखा समिति ने रेलवे से सिफारिश की है कि रेलवे को किराया घटाकर बर्थ की अधिकतम बुकिंग पर ध्यान देना चाहिए। रिपोर्ट में ये भी कहा, रेलवे को नई ट्रेनें शुरू करने से पहले पूरी योजना बनानी चाहिए और किराए में कमी करके बर्थ की अधिकतम बुकिंग सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि रेलवे का राजस्व बढ़े।
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नया संसद भवन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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रेलवे को नई ट्रेनें शुरू करने से पहले पूरी योजना बनानी चाहिए और किराए में कमी करके बर्थ की अधिकतम बुकिंग सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि रेलवे का राजस्व बढ़े। यह सुझाव संसद की लोक लेखा समिति ने अपनी रिपोर्ट में दिया है, जिसे 21 मार्च को 18वीं लोकसभा में पेश किया गया। 
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समिति ने 20 अप्रैल 2023 को पेश की थी रिपोर्ट
समिति ने अपनी पिछली रिपोर्ट (139वीं रिपोर्ट), जो 20 अप्रैल 2023 को 17वीं लोकसभा में प्रस्तुत की गई थी, में सुविधा एक्सप्रेस ट्रेनों के संचालन से राजस्व हानि पर चिंता जताई थी। उस रिपोर्ट में पाया गया था कि डायनामिक प्राइसिंग (बदलते किराए) के कारण सीटें खाली रह गईं और रेलवे को नुकसान हुआ। दक्षिण पश्चिम रेलवे ने सुझाव मिलने के बावजूद इन ट्रेनों को तत्काल विशेष या सुपरफास्ट एक्सप्रेस में बदलने की जरूरत नहीं समझी, जिससे 2016 से 2021 के बीच 80.74 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

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रेलवे मंत्रालय ने नुकसान के दावों पर कही ये बात
हालांकि, रेलवे मंत्रालय ने कहा कि इस अवधि में वास्तविक कमाई अनुमानित आय से 7.9 करोड़ रुपये ज्यादा रही, इसलिए इसे नुकसान नहीं माना जा सकता। लेकिन समिति रेलवे के इस तर्क से असंतुष्ट रही और दोबारा सुझाव दिया कि अगर किराए में सुधार किया जाए तो रेलवे को अधिक यात्री मिल सकते हैं और राजस्व भी बढ़ेगा। 

ऊंचा किराए से लोग हवाई यात्रा की तरफ हो सकते हैं आकर्षित
समिति ने यह भी कहा कि अत्यधिक ऊंचा किराया यात्रियों को हवाई यात्रा की ओर आकर्षित कर सकता है, जो रेलवे के लिए घाटे का सौदा होगा। इसलिए, रेलवे को अपने किराए की समीक्षा करनी चाहिए और ऐसा समाधान निकालना चाहिए जो यात्रियों के लिए सुविधाजनक हो।  

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बर्थ खाली रहने पर जताई चिंता
रिपोर्ट में बताया गया कि 2016 से 2021 के बीच सुविधा एक्सप्रेस ट्रेनों की एसी-2 और एसी-3 श्रेणी में सीटें 60% से भी कम भरीं। जबकि इसी मार्ग पर अन्य ट्रेनों की औसत बुकिंग 144% तक थी। इससे यह स्पष्ट हुआ कि समस्या त्योहारों या छुट्टियों के कारण नहीं थी, बल्कि ऊंचे किराए के कारण लोग यात्रा करने से बच रहे थे। रेलवे मंत्रालय ने जवाब दिया कि ट्रेन की बुकिंग के आधार पर किराए की समीक्षा और छूट देने जैसी योजनाएं बनाई जाती हैं। इसके तहत कम भीड़ वाले रूट्स पर एसी-3 को एसी चेयर कार में बदला जा सकता है, जिससे किराया कम हो और यात्री बढ़ें।

सीट बुकिंग को बेहतर बनाने के लिए एआई का सुझाव
समिति ने रेलवे को सुझाव दिया कि यात्रियों की मांग को समझने के लिए एक एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) मॉडल विकसित किया जाए। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि किस समय और किस रूट पर कौन-सी सीट ज्यादा पसंद की जाती है। इसके आधार पर टिकटों का सही आवंटन किया जा सकता है, जिससे सीटें खाली न रहें। समिति ने यह भी कहा कि रेलवे को किराए को लचीला बनाना चाहिए, ताकि जब सीटें खाली हों, तो किराया कम किया जा सके और ज्यादा यात्री ट्रेन से सफर करें।

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