कोरोना का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। फ्रंटलाइन रेल कर्मी इस संक्रमण का तेजी से शिकार हो रहे है। रेलवे के अस्पतालों में भी बेड बामुश्किल ही मरीजों को मिल रहा है। वेंटिलेटर की कमी भी रेल कर्मियों को खलने लगी है। हर दिन एक हजार रेल कर्मी संक्रमित हो रहे है।
इसे ही देखते हुए रेलवे ने अब अपने कर्मचारियों को बचाने की मुहिम तेज कर दी है। रोड मैप तैयार कर रेलवे के अस्पतालों को आधुनिक चिकित्सा से लैस किया जा रहा है।
कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में रेलवे कोई कसर नहीं छोड़ रही है। एक तरफ ऑक्सीजन से लदी ऑक्सीजन एक्सप्रेस चलाई जा रही है तो वहीं दूसरी तरफ भारतीय रेल ने अपनी आंतरिक चिकित्सा सुविधाओं को भी चाक-चौबंद कर लिया है। रेलवे अस्पतलों में ऑक्सीजन की कमी ना हो इसके लिए 52 ऑक्सीजन संयंत्र लगाने की मंजूरी दी गई है।
फिलहाल देशभर के 86 रेलवे अस्पतालों में 4 ऑक्सीजन संयंत्र ही काम कर रहे है। इन अस्पतालों में व्यापक क्षमता वृद्धि की योजना तैयार की गई है।
रेल मंत्रालय ने दावा कि है कि जल्द ही 30 ऑक्सीजन उत्पादन संयंत्र तैयार हो जाएंगे। सभी रेल कोविड अस्पतालों को ऑक्सीजन संयंत्रों से लैस किया जाएगा। सभी जोन के महाप्रबंधकों को अधिकार दिया गया है कि दो करोड़ रुपये तक के ऑक्सीजन उत्पादन संयंत्रों को मंजूरी दे सकते है।
इसके अलावा रेलवे ने कोविड के इलाज के लिए अस्पतालों में बेड की संख्या 2539 से बढ़ाकर 6972 की है। इसी तरह आईसीयू बेड की संख्या 273 से बढ़ाकर 573 की गई है तो 62 वेंटिलेशन को बढ़ाकर 296 की गई है।
बीआईपीएपी मशीन, ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर, ऑक्सीजन सिलेंडर समेत कई मेडिकल उपकरण भी उपलब्ध कराया गया है। यह भी निर्देश जारी किया है कि कोविड प्रभावित कर्मचारियों को पैनल में शामिल अस्पतालों में जरूरत के अनुसार रेफरल आधार पर भर्ती किया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि अबतक दो हजार रेल कर्मियों की मौत कोविड की वजह से हुई है।