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Railways: रेलवे के मिशन क्लीन में 12वीं और ITI पास को मिलेगा मौका, ट्रेनिंग के बाद होगी सुपरवाइजर पद पर तैनाती

Mon, 16 Feb 2026 04:16 PM IST
राहुल कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

रेलवे ने 52 सप्ताह, 52 रिफॉर्म का संकल्प लिया है। इसके तहत हर सप्ताह एक रिफॉर्म करने की योजना है। इसके तहत ट्रेनों में बाथरूम, डस्टबिन, कोच की सफाई एक घंटे के अंतराल में होती रहेगी। यात्री सफाई नहीं हुई या ठीक से नहीं हुई तो फोटो रेल वन ऐप या रेलवे के सोशल मीडिया हैंडल पर डाल सकेंगे। छोटी-मोटी इलेक्ट्रिक मरम्मत जैसे लाइट या स्विच काम न करने जैसी शिकायतों को भी चलती ट्रेन में दूर किया जा सकेगा।
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भारतीय रेलवे - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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भारतीय रेलवे ट्रेनों में साफ-सफाई के लिए नई व्यवस्था अपनाने जा रहा है। रेलवे ने एसी कोच के साथ ही जनरल कोच में भी यात्रा के दौरान सफाई करने का निर्णय लिया है। अब सभी कोच में एक घंटे के अंतराल में साफ सफाई होगी। रेलवे को इस मॉडल को लागू करने के लिए बड़ी संख्या में सफाई कर्मियों की जरूरत पड़ेगी, जबकि काम की निगरानी के लिए सुपरवाइजर भी तैनात किए जाएंगे।

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इसमें खास बात यह है कि स्टाफ को पहले ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके बाद ही उन्हें साफ सफाई की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इस पर निगरानी रखने के लिए सुपरवाइजर भी नियुक्ति किए जाएंगे। इसके लिए 12वीं पास या आईटीआई डिप्लोमा को अनिवार्य योग्यता तय किया है। इस नई व्यवस्था से रेलवे पर अतिरिक्त खर्च जरूर बढ़ेगा, लेकिन यात्रियों पर किसी तरह का अतिरिक्त बोझ नहीं डाला जाएगा।

12वीं पास या आईटीआई डिप्लोमा होना अनिवार्य
रेल मंत्री के मुताबिक, सफाई कर्मी तस्वीरें सीधे कंट्रोल रूम में भेजेंगे, जिससे रियल टाइम मॉनिटरिंग हो सकेगी। इसके लिए एक कंट्रोल रूम भी बनाया गया है। सफाई मानकों में कमी मिलने पर संबंधित वेंडर पर कार्रवाई की जाएगी, जबकि बेहतर प्रदर्शन करने वाले वेंडरों को ही आगे कॉन्ट्रैक्ट दिए जाएंगे। साफ-सफाई की निगरानी के लिए तैनात किए जाने वाले स्टाफ को पहले ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके बाद ही उन्हें जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इस व्यवस्था के तहत नियुक्त किए जाने वाले सुपरवाइजर के लिए 12वीं पास या आईटीआई डिप्लोमा होना अनिवार्य किया गया है।
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रेलमंत्री ने कहा, यात्री सफाई नहीं हुई या ठीक से नहीं हुई तो यात्री फोटो रेल वन ऐप या रेलवे के सोशल मीडिया हैंडल पर डाल सकेंगे। छोटी-मोटी इलेक्ट्रिक मरम्मत जैसे लाइट या स्विच काम न करने जैसी शिकायतों को भी चलती ट्रेन में दूर किया जा सकेगा। हर जोन से 5-6 ट्रेनों को पहले चरण में चिह्नित कर सफाई व्यवस्था लागू होगी।  पहले चरण के तहत लंबी दूरी की 80 ट्रेनों का चयन किया गया हैं। इसमें हर जोन की चार से पांच ट्रेनें शामिल है। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से 80-80 ट्रेनों के समूह में इस व्यवस्था को लागू किया जाएगा। अगले तीन वर्षों में सभी ट्रेनों में इस सफाई मॉडल को लागू करने की योजना है। रेल मंत्री ने कहा कि पहले लिनेन उपलब्ध कराने वाला वेंडर अलग था, बाथरूम, कोच सफाई का अलग। अब पारदर्शी तरीके से काम दिया जाएगा, ताकि जिम्मेदारी एक जगह हो। सफाई की निगरानी एआई कैमरों से होगी।

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