रेलवे ने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए एक नीति तैयार की है। इसके तहत दिसंबर 2025 तक डीजल, जैव ईंधन या प्राकृतिक गैस से चलने वाहनों के बेड़े को इलेक्ट्रिक में बदला जाएगा। साथ ही, सभी प्रमुख रेलवे स्टेशनों , कार्यालय भवनों और पार्किंग स्थल पर भी चार्जिंग का एक विशाल बुनियादी ढांचा तैयार किया जाएगा। इस नीति का मकसद भारत को 2030 तक इलेक्ट्रिक वाहन वाला देश बनाने में सरकार का समर्थन करना है।
वैश्विक बेंचमार्क से मेल खाने के लिए देश को साल 2030 तक 46,000 ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की जरूरत है। रेलवे द्वारा अलग-अलग जोन के लिए प्रस्तावित समयसीमा के अनुसार, ईवी-चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने और दिसंबर 2023 तक 20 प्रतिशत, 2024 तक 60 प्रतिशत और 2025 तक 100 प्रतिशत वाहनों को इलेक्ट्रिक में बदलने का लक्ष्य रखा गया है।
नई नीति के तहत रेलवे अपने परिसर में यात्रियों, आगंतुकों और आम जनता समेत उपयोगकर्ताओं के लिए चार्जिंग का एक किफायती और सुलभ बुनियादी ढांचा भी तैयार करेगी। रेलवे ने इसके लिए अपने क्षेत्रीय रेलवे महाप्रबंधकों, अधिकारियों से सलाह देने को भी कहा है ताकि ईवी-चार्जिंग सुविधा स्थापित करने के लिए पार्किंग स्थलों की पहचान करने और उनका सीमांकन करने में आसानी हो सके।
इन स्थानों पर ईवी-चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए सीपीओ (चार्जिंग प्वाइंट ऑपरेटर्स) को आमंत्रित किए जाएंगे। चार्जिंग की सुविधा का इस्तेमाल करने पर रेलवे द्वारा तय पार्किंग शुल्क सुविधाय होगी। सीपीओ की सभी ईवी मालिकों तक पहुंच सुनिश्चित की जाएगी और ईवी यूजर्स के लिए चार्जर का पता लगाने या बुक करने डिजिटल सेवा से भुगतान करने के लिए एक मोबाइल एप्लीकेशन होगा।
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण या अन्य सक्षम एजेंसियों व विभागों द्वारा जारी गाइडलाइंस के अनुसार ही चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना की जाएगी।