रेलवे बोर्ड जल्द ही ड्राइवर, गार्ड और गैंगमैन के पद पर कार्यरत महिला कर्मियों की समस्याओं को देखते हुए उनको कैडर (विभाग) बदलने का मौका देगा। उनको टिकट चेकिंग और बाबू के पद पर रखा जा सकता है। इस संबंध में कार्मिक विभाग को नीति बनाकर उचित कदम उठाने के आदेश दिए गए हैं।
रेलवे में ड्राइवर, गार्ड और गैंगमैन के पद पर कार्यरत महिला कर्मियों को विषम परिस्थितियों में काम करना पड़ता है। दरअसल, इन पदों पर पुरुष कर्मचारियों की तुलना में महिला कर्मियों की संख्या बहुत कम है। इससे वह कार्य में खुद को असहज महसूस करती हैं। दूसरा, उनकी सुरक्षा को लेकर पर भी चिंता बनी रहती है। जैसे कि महिला गार्ड को मालगाड़ी लेकर जाना पड़ता है। रात में मालगाड़ी को कभी भी जंगल में रोक दिया जाता है। ऐसे में महिला गार्ड को सुरक्षा को लेकर डर बना रहता है।
ड्राइवर महिला कर्मियों को इंजन में शौचालय तक उपलब्ध नहीं हैं। इसी तरह पटरियों में काम करने वाले गैंग में एक या दो महिला कर्मी ही रहती हैं, जिससे उनको पुरुष कर्मचारियों के बीच काम करना असहज लगता है। रेलवे की यूनियनें भी उक्त पदों पर काम करने वाली महिला कर्मियों की समस्याएं उठा रही हैं।
रेलवे की कार्य पद्धति को और बेहतर बनाने के लिए रेलवे बोर्ड अध्यक्ष अश्विनी लोहानी ने 17 जुलाई को अलग-अलग रेल मंडलों के छह अफसरों से दिल्ली में मुलाकात की। इस बैठक में रेलवे बोर्ड के भी ग्यारह अफसर मौजूद थे। इस मौके पर मंडल के अफसरों ने परिचालन से जुड़े उक्त कैडर में काम करने वाली महिलाओं की समस्याओं को रखा, जिसको बोर्ड अफसरों ने जायज माना।
इस पर उक्त कैडर की महिला कर्मियों को कैडर बदलने का एक मौका देने का निर्णय लिया गया। झांसी रेल मंडल में गार्ड, ड्राइवर और गैंगमैन के पद पर करीब 100 महिला कर्मी कार्यरत हैं। इस संबंध में जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि रेलवे बोर्ड स्तर पर इस निर्णय पर नीति बनाई जा रही है।