शुक्रवार शाम को केंद्र सरकार ने श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाने की घोषणा होने के बाद अनेक लोगों के मन में कई सवाल घूमने लगे। बहुत से लोगों ने भारतीय रेलवे की अधिकारिक बुकिंग वेबसाइट को खंगालना शुरु कर दिया।
जो लोग रेलवे में नौकरी करते हैं, सरकार के ताजा आदेशों को समझने के लिए उनके पास जानकारों के फोन आने लगे। लोगों का एक ही सवाल था कि क्या इन स्पेशल ट्रेनों में वे भी जा सकते हैं। टिकट कितने का होगा और बुकिंग विंडो कब खुलेगी, आदि सवाल पूछे गए।
शाम को उत्तर रेलवे के पीआरओ ने स्पष्ट कर दिया कि ये गाड़ियां श्रमिक स्पेशल हैं। इनमें केवल वही व्यक्ति सफर करेगा, जिसे राज्य सरकार इजाजत देगी।
मतलब इसे यूं भी समझा जा सकता है कि श्रमिक स्पेशल ट्रेन को रेलवे चलाएगा, बाकी सभी तरह की औपचारिकताएं राज्य सरकार ही पूरा करेगी।
रेलवे की टिकट खिड़की बंद रहेगी। इन ट्रेनों के लिए कोई बुकिंग नहीं होगी ताकि कोई भी व्यक्ति स्टेशन पर न आए।
रेलवे की ओर से कहा गया है कि श्रमिक स्पेशल गाड़ियों में केवल जिला प्रशासन द्वारा नामित व्यक्ति ही सफर कर सकता है। कोई भी व्यक्ति जो दूसरे राज्य में फंसा है और अपने घर जाना चाहता है तो वह जिला प्रशासन से संपर्क करे।
रेलवे प्रशासन इन ट्रेनों के लिए किसी तरह का कोई टिकट जारी नहीं करेगा। श्रमिक स्पेशल गाड़ी के लिए राज्य को पूर्ण अथॉरिटी बनाया गया है। रेलवे प्रशासन केवल उन्हीं लोगों को स्टेशन परिसर में आने देगा, जिनके पास जिला प्रशासन की मंजूरी होगी।
रेलवे स्टेशनों पर भीड़ न हो, इसके लिए राज्य सरकारें समूह में लोगों को भेजेंगी। एक ट्रेन में केवल 1000 से 1200 के बीच ही यात्री सवार होंगे। दिल्ली, मुंबई, कोलकत्ता और चेन्नई जैसे बड़े शहरों में भी ये स्पेशल गाड़ी चलाने के लिए रेलवे और राज्य सरकारों के बीच बातचीत चल रही है।
ट्रेन में सवार होने से पहले सभी लोगों की मेडिकल जांच होगी। उन्हें सर्टिफिकेट दिया जाएगा। हो सकता है कि उनके हाथ पर पक्की स्टैंप भी लगा दी जाए। लंबी दूरी की ट्रेनों में लोगों को एक वक्त का खाना रेलवे की ओर से मुहैया कराया जाएगा। गाड़ी में सवार सभी लोगों को मास्क लगाना जरूरी होगा।