चादर और दूसरी ऐसी चीजों की चोरी की भरपाई कोच अटेंडेंट को करनी पड़ती है जबकि बाथरूम के सामान की भरपाई रेलवे करता है। यह देखना कोच अटेंडेंट की जिम्मेदारी होती है कि हर यात्री ने रेलवे की ओर से दिया गया सारा सामान वापस कर दिया हो, इसके लिए वह मुस्तैद भी रहता है लेकिन वह यात्रियों की तलाशी नहीं ले सकता।
बता दें कि रेलवे ने पिछले दिनों शब्बीर रोटीवाला नामक यात्री को रेलवे ने सामान चोरी किए जाने के आरोप में गिरफ्तार किया है। उनके पास से तीन कंबल, छह चादरें और तीन तकिये प्राप्त किए हैं। शब्बीर बांद्रा से रतलाम जा रही ट्रेन में यात्रा कर रहा था।
लगातार चोरी से परेशान रेलवे अब ट्रायल के तौर पर यात्रियों को डिस्पोजेबल तौलिया और तकिया का खोल दे रहा है। रेलवे को डिस्पोजेबल बेडशीट की कीमत 132, तौलिया की 22 और तकिया की 25 रुपये पड़ती है।
रेलवे यात्रियों द्वारा की जा रही चोरियों से निपटने के लिए सस्ते विकल्पों से बदलने की योजना पर भी काम कर रहा है। यही नहीं पश्चिम रेलवे के अधिकारी का कहना है कि फिलहाल कुछ ट्रेनों में ट्रायल के तौर पर डिस्पोजेबल तौलिया और तकिया के खोल दिए जा रहे हैं।
अभी रेलवे ने इसका आकलन नहीं किया है अगर इससे रेलवे को फायदा होगा तो सभी ट्रेनों में इसे लागू किया जाएगा। यही नहीं चोरियों और चोरों से निपटने के लिए कई ट्रेनों में सेंसर-टैप और सीसीटीवी जैसी सुविधाएं हैं लेकिन वह एक यात्रा तक भी टिक नहीं पातीं।