आरपीएफ की टीम ने जनवरी में ही सैकड़ों बच्चों को बचाया।
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रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने इस साल जनवरी में ही 1045 बच्चों को तस्करी से बताया है। इनमें 344 लड़कियां भी शामिल रहीं। बताया गया है कि अगर इन्हें समय पर नहीं बचाया जाता तो उनका शोषण होने की संभावना थी। रेलवे ने गुरुवरा को बयान जारी कर बताया कि बच्चों को बचाने के लिए आरपीएफ ने ऑपरेशन 'नन्हे फरिश्ते' चलाया था।
रेलवे के मुताबिक, मौजूदा समय में देश के 132 रेलवे स्टेशनों पर बच्चों के लिए हेल्पडेस्क मौजूद हैं, जो कि तस्करी रोकने में अहम भूमिका निभा रही हैं। आधिकारिक रिलीज के मुताबिक, आरपीएफ ने जनवरी में 'मिशन जीवन रक्षक' के तहत 42 लोगों की जान भी बचाई। इनमें 20 पुरुष और 22 महिलाएं शामिल रहीं।
गौरतलब है कि आरपीएफ लगातार रेल यात्रा करने वाले लोगों को ट्रेन की चपेट में आने से बचा रहा है। इसके लिए आरपीएफ के जवान दिन से लेकर रात तक रेलवे स्टेशनों पर चौकसी के साथ तैनात रहते हैं। रिलीज में कहा गया है कि जनवरी में आरपीएफ ने मेरी सहेली नाम की एक टीम को अलग-अलग रेलवे स्टेशनों में उतारा। इसके जरिए महिला यात्रियों को सुरक्षा देने का लक्ष्य रखा गया। खासकर ऐसी महिलाओं को जो अकेले यात्रा कर रही थीं।
आरपीएफ ने ऐसी महिलाओं की सुरक्षा के लिए पूरे भारत में करीब 13 हजार ट्रेनों की निगरानी की है। रेलवे पुलिस बल ने इस दौरान छेड़छाड़ के मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार भी किया है। इसके अलावा 2185 लोगों को महिलाओं के लिए आरक्षित डिब्बों में सफर करते भी पकड़ा गया।
इतना ही नहीं, आरपीएफ ने ट्रेनों के जरिए की जा रही अवैध वस्तुओं की तस्करी को रोकने में भी अहम भूमिका निभाई है। अपने ऑपरेशन सतर्क के जरिए आरपीएफ ने जनवरी में ही 19 करोड़ रुपये की अवैध शराब, तस्करी किया हुआ सामान, 119 लोगों से 2.50 करोड़ का बेनामी कैश, 4.90 करोड़ का बेनामी सोना, 2.18 लाख का तस्करी किया हुआ विदेशी सामान और 19 लाख के तंबाकू के उत्पादों को पकड़ा।