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रेलवे पास धारकों के लिए खुशखबरी: अब इन प्रीमियम ट्रेनों के उच्च श्रेणी में कर सकेंगे सफर, क्या है नया नियम?

Fri, 30 Oct 2026 05:18 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

रेलवे बोर्ड ने पास धारकों को राजधानी, दुरंतो और शताब्दी जैसी प्रीमियम ट्रेनों में बड़ी राहत दी है। अब विशेषाधिकार, सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले मानार्थ और विधवा पास धारक किराये का अंतर देकर अपनी पात्रता से ऊंची श्रेणी में सफर कर सकेंगे। पहले इस सुविधा को लेकर असमंजस था। आखिर यह नियम किन यात्रियों पर लागू होगा? रेलवे ने इसे लागू करने के लिए क्या बदलाव करने को कहा है? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...

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क्या है रेलवे बोर्ड का नया फैसला और किसे मिलेगा फायदा? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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रेलवे ने अपने कर्मचारियों, सेवानिवृत्त कर्मचारियों और उनके परिवारों से जुड़े पास धारकों को बड़ी राहत दी है। अब वे राजधानी, दुरंतो और शताब्दी जैसी प्रीमियम ट्रेनों में अपने पास पर मिलने वाली श्रेणी से ऊपर की श्रेणी में भी यात्रा कर सकेंगे। इसके लिए उन्हें केवल दोनों श्रेणियों के किराये का अंतर चुकाना होगा। रेलवे बोर्ड ने इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करते हुए नई व्यवस्था की जानकारी दी है। इससे उन यात्रियों को फायदा होगा, जो पहले पास के आधार पर उच्च श्रेणी में सफर करने को लेकर असमंजस में रहते थे।

रेलवे ने अपने कर्मचारियों, सेवानिवृत्त कर्मचारियों और उनके परिवारों से जुड़े पास धारकों को बड़ी राहत दी है। अब वे राजधानी, दुरंतो और शताब्दी जैसी प्रीमियम ट्रेनों में अपने पास पर मिलने वाली श्रेणी से ऊपर की श्रेणी में भी यात्रा कर सकेंगे। इसके लिए उन्हें केवल दोनों श्रेणियों के किराये का अंतर चुकाना होगा। रेलवे बोर्ड ने इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करते हुए नई व्यवस्था की जानकारी दी है। इससे उन यात्रियों को फायदा होगा, जो पहले पास के आधार पर उच्च श्रेणी में सफर करने को लेकर असमंजस में रहते थे।

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क्या है रेलवे बोर्ड का नया फैसला और किसे मिलेगा फायदा?
रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि विशेषाधिकार पास (पीपी), सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले मानार्थ पास (पीआरसीपी) और विधवा पास (डब्ल्यूपी) धारक प्रीमियम ट्रेनों में अपनी पात्रता से ऊपर की श्रेणी में यात्रा कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें लागू किराये का अंतर देना होगा। यह सुविधा राजधानी, दुरंतो और शताब्दी एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों में मिलेगी। पहले इस बात को लेकर स्पष्टता नहीं थी कि क्या कोई रेलवे कर्मचारी या सेवानिवृत्त कर्मचारी अपने मानार्थ पास का इस्तेमाल करके अधिक किराये वाली श्रेणी में यात्रा कर सकता है और इसके लिए अतिरिक्त रकम दे सकता है। रेलवे बोर्ड ने अब इस असमंजस को दूर कर दिया है। यानी पास पर जिस श्रेणी में यात्रा की अनुमति है, उससे ऊपर की श्रेणी में जाने के लिए यात्री को पूरा टिकट खरीदने की जरूरत नहीं होगी, बल्कि दोनों श्रेणियों के किराये के बीच का अंतर चुकाना होगा।

किन रेलवे पास धारकों पर लागू होगा यह नियम?

  • यह फैसला तीन तरह के पास धारकों के लिए है। इनमें विशेषाधिकार पास, सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाला मानार्थ पास और विधवा पास शामिल हैं।
  • विशेषाधिकार पास (पीपी): रेलवे कर्मचारियों को मिलने वाला यह पास उन्हें निर्धारित नियमों के तहत मुफ्त यात्रा की सुविधा देता है।
  • सेवानिवृत्ति के बाद मानार्थ पास (पीआरसीपी): सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारियों को मिलने वाला यह पास उन्हें यात्रा की सुविधा देता है।
  • विधवा पास (डब्ल्यूपी): रेलवे कर्मचारियों की विधवाओं को नियमों के तहत यह पास दिया जाता है।

इन पासों के जरिए यात्रा करने वाले लोग अब प्रीमियम ट्रेनों में अपनी पात्रता से ऊंची श्रेणी चुन सकते हैं। हालांकि, इसके लिए उन्हें निर्धारित किराये का अंतर देना होगा। यह सुविधा पास की पात्रता को पूरी तरह बदलने के बजाय अतिरिक्त किराया चुकाकर ऊंची श्रेणी में यात्रा करने का विकल्प देती है।

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पहले क्या परेशानी थी और अब नियमों में क्या स्पष्ट किया गया है?
रेलवे सेवक पास नियम, 1986 में कर्मचारियों, उनके परिवारों और आश्रितों को मुफ्त या रियायती रेल यात्रा की सुविधा देने के प्रावधान हैं। इसी नियम के तहत पास धारकों को यात्रा की पात्रता तय होती है। लेकिन राजधानी, दुरंतो और शताब्दी जैसी प्रीमियम ट्रेनों में अपनी पात्रता से ऊंची श्रेणी में यात्रा करने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी। सवाल यह था कि क्या पास धारक अतिरिक्त किराया देकर उच्च श्रेणी में सफर कर सकते हैं। इस मामले पर रेलवे बोर्ड विचार कर रहा था। बोर्ड ने वाणिज्य निदेशालय से भी इस विषय पर सलाह ली। इसके बाद स्पष्ट किया गया कि पीपी, पीआरसीपी और डब्ल्यूपी धारक किराये का अंतर चुकाकर ऊंची श्रेणी में यात्रा कर सकते हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, अब रेलवे बोर्ड ने रेलवे सेवक पास नियम, 1986 की अनुसूची-दो के नियम 3(एक्स) के तहत इसकी अनुमति स्पष्ट कर दी है।

नई व्यवस्था लागू करने के लिए रेलवे ने क्या कदम उठाए हैं?
रेलवे बोर्ड ने कहा है कि पास और यात्रा पात्रता से जुड़े पुराने सभी निर्देशों की जगह अब यह नया स्पष्टीकरण लागू होगा। यानी पास और यात्रा प्राधिकरण आदेश (पीटीओ) से संबंधित पहले जारी निर्देशों को इस फैसले के बाद प्रभावी नहीं माना जाएगा। बोर्ड ने रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र (क्रिस) को तत्काल जरूरी बदलाव करने की सलाह दी है। क्रिस को यात्री आरक्षण प्रणाली (पीआरएस) और मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (एचआरएमएस) के ई-पास मॉड्यूल में बदलाव करने होंगे। इन बदलावों का उद्देश्य नई व्यवस्था को टिकट आरक्षण और पास जारी करने की प्रक्रिया में लागू करना है। इससे पास धारकों को ऊंची श्रेणी में यात्रा के लिए किराये का अंतर चुकाने की सुविधा देने में मदद मिलेगी। कुल मिलाकर, रेलवे बोर्ड के इस फैसले से कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और विधवा पास धारकों के लिए प्रीमियम ट्रेनों में यात्रा का एक अतिरिक्त विकल्प खुल गया है।

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