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भारतीय रेल: काम में बढ़ते दबाव के चलते रेलवे अफसर ले रहे हैं वीआरएस, नौ महीने में घर पहुंचे 77 अधिकारी

Fri, 15 Apr 2022 05:26 PM IST
अभिषेक दीक्षित डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बीते नौ महीने में भारतीय रेलवे के 77 वरिष्ठ अधिकारियों ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली है। इनमें दो सचिव स्तर के अधिकारी भी शामिल हैं।
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अश्विनी वैष्णव - फोटो : ANI
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विस्तार
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पूर्व नौकरशाह अश्विनी वैष्णव रेल मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालने के बाद से ही एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। ताबड़तोड़ फैसले ले रहे हैं। वैष्णव जिस तरह से रेलवे का कायाकल्प करने में जुटे हैं, इससे विभाग के कई अफसरों की शामत आ गई है ऐसे में रेलवे से वीआरएस मांगने वाले कर्मचारियों और अफसरों की संख्या में इजाफा होता दिखाई दे रहा है।

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मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बीते नौ महीने में भारतीय रेलवे के 77 वरिष्ठ अधिकारियों ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली है। इनमें दो सचिव स्तर के अधिकारी भी शामिल हैं। सूत्रों ने बताया कि किसी भी वित्तीय वर्ष में पहली बार रेलवे से इतनी बड़ी संख्या में सीनियर अधिकारियों ने वीआरएस लिया है। इस साल जनवरी में ही रेलवे से अधिकतम 11 अधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया। इसे काम के प्रदर्शन के बढ़ते दबाव के तौर पर भी देखा जा रहा है। 

वहीं, विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे रेलवे के वरिष्ठ इंजीनियरों ने भी सहमति जताते हुए कहा कि फिलहाल मंत्रालय में प्रदर्शन का दबाव पहले की तुलना में काफी बढ़ गया है। कर्मचारी और अधिकारियों का तर्क है कि मंत्रालय ने काफी मुश्किल टारगेट रखे हैं। रेलवे में उच्च स्तर से निगरानी के कारण पिछले कुछ महीनों में चीजें बहुत बदल गई हैं। कुछ ऐसे लोगों ने भी वीआरएस लिया है, जिन्हें लगा कि उन्हें उचित प्रमोशन नहीं मिला है।
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रेल मंत्री ने दिया था सख्त निर्देश
पिछले साल जुलाई में रेल मंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के बाद अश्विनी वैष्णव ने अधिकारियों को प्रदर्शन करने या बाहर होने के लिए तैयार रहने की बात कही थी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, रेल मंत्री इस बात पर जोर देते रहे हैं कि उन लोगों के लिए रेलवे में कोई जगह नहीं है जो अच्छा प्रदर्शन नहीं करते और भ्रष्टाचार का सहारा लेते हैं। उन्होंने कहा है कि ऐसे अधिकारी या कर्मचारी या तो वीआरएस ले लें नहीं तो उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा।

हाल ही में वंदे भारत एक्सप्रेस की रिव्यू मीटिंग के दौरान भी रेल मंत्री ने रेल मंत्रालय के अफसरों की कार्यप्रणाली को लेकर काफी नाराजगी जताई थी। बैठक में उन्होंने संकेत दिया था कि आने वाले दिनों में रेल मंत्रालय और रेलवे कोच फैक्टरियों और पीएसयू के लापरवाह अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो सकती है। इसके बाद से ही रेल मंत्रालय के अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है। 

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