नमक ढुलाई में रेलवे का फास्ट ट्रैक फॉर्मूला
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वहीं, अनलोडिंग की प्रक्रिया भी उतनी ही आसान और तेज रही। हाइड्रोलिक टिपर ट्रक की मदद से कंटेनर को करीब 45 डिग्री तक झुकाया गया और पांच मिनट से भी कम समय में पूरा नमक खाली कर दिया गया। कंटेनर के साइड में दिए गए दरवाजों से नमक अपने आप नीचे गिर जाता है, जिससे अंदर कोई अवशेष नहीं बचता। इस वजह से अतिरिक्त सफाई की जरूरत भी नहीं पड़ती।
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एक स्टेनलेस स्टील कंटेनर का खाली वजन करीब तीन टन है। इससे बड़े पैमाने पर नमक की ढुलाई समय पर और बिना रुकावट के की जा सकती है। इन कंटेनरों के इस्तेमाल से मैनुअल वैगन क्लीनिंग की जरूरत खत्म हो जाती है और किसी तरह की कोटिंग भी नहीं करनी पड़ती। लोडिंग और अनलोडिंग जल्दी होने से वैगनों का टर्नअराउंड टाइम घटता है। ऑपरेशन की क्षमता बढ़ती है। भीमासर-गांधीधाम सेक्शन में हुआ यह पहला ट्रायल भारतीय रेलवे के लिए एक अहम उपलब्धि माना जा रहा है। यह पहल तकनीकी रूप से सफल रही और आत्मनिर्भर, सुरक्षित व कुशल माल परिवहन के लक्ष्य की दिशा में मजबूत कदम साबित हुई है।
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