फ्लैक्सी फेयर ही नहीं बाल यात्रियों से भी रेलवे अपनी जेब भर रहा है। बाल यात्रियों को आरक्षित बर्थ देने पर बर्थ का चार्ज लेकर रेलवे ने अपनी कमाई के जरिए को पहले से काफी बढ़ा लिया है। 5-12 साल के बच्चों को आरक्षित बर्थ देकर पिछले एक साल में रेलवे ने 914 करोड़ रुपये की कमाई की है जो पिछले साल की अपेक्षा 228 करोड़ रुपये अधिक है।
कुल 17 जोन में उत्तर रेलवे ने बच्चों से सबसे अधिक कमाई कर रिकार्ड बनाया है। दूसरे नंबर पर दक्षिण रेलवे है। रेल मंत्रालय कॉमर्शियल विकास में ही नहीं यात्रियों की जेब भी ढीली करने में पीछे नहीं है।
एक तरफ जितनी भी नई ट्रेनें चल रही है, उनमें 15 प्रतिशत तक यात्रा किराया बढ़ा दिया गया है तो वहीं शताब्दी, राजधानी व दुरंतो ट्रेन में फ्लैक्सी फेयर लागू कर डायनेमिक यात्रा किराया वसूला जा रहा है। पहले तो बाल यात्रियों से आरक्षित बर्थ की बुकिंग भी हॉफ टिकट पर ही होती थी लेकिन नया फरमान जारी कर केंद्रीय रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने 5-12 वर्ष के उम्र के बच्चों का
भी आरक्षित बर्थ व्यस्कों की श्रेणी में ला दिया है। पिछले साल 21 अप्रैल से इस फरमान को लागू किया गया। जिसका फायदा रेलवे को मिल रहा है।