रेलवे एक्सपर्ट आईडी शर्मा के मुताबिक, वंदे भारत एक्सप्रेस का वजन दूसरी गाड़ियों से 10-20 फीसदी कम रहता है। इसमें कोई भी सवारी ड्राइवर तक सीधे पहुंच सकती है। गाड़ी के हर पहिये पर लगी ट्रैक्शन मोटर एक सुरक्षित सफर की गारंटी होती है। यही वह तकनीक है, जिससे गाड़ी बिना किसी देरी के स्पीड पकड़ लेती है। अगर आपातकालीन ब्रेक का इस्तेमाल करना पड़े, तो भी यह गाड़ी बिना ट्रैक छोड़े तुरंत रुक जाती है। बता दें कि दिल्ली मेट्रो ट्रेन के पहियों में भी ट्रैक्शन मोटर लगी होती है। इसी के चलते मेट्रो चंद सेकेंड में रफ्तार पकड़ लेती है, तो दूसरी ओर वह तेज गति में होने के बावजूद तुरंत रुक भी जाती है।
इसके कोच की बनावट ऐसी है कि किसी भी आपातकालीन स्थिति में भी यात्री सुरक्षित रहते हैं। इसके हर पहिये पर अलग से न्यूमेटिक एयरब्रेक सिस्टम लगा है। न्यूमेटिक एयरब्रेक सिस्टम, भारतीय रेलवे की नवीनतम तकनीक मानी जाती है। यह ब्रेक सिस्टम इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से ऑपरेट होता है। इसकी मदद से किसी भी इमरजेंसी में गाड़ी को रोका जा सकता है। ब्रेक लगने के बाद हाईस्पीड में चल रही गाड़ी डेढ़ सौ मीटर दूरी पर रुक जाती है।
न्यूमेटिक एयरब्रेक सिस्टम की एक खासियत यह भी है कि इनके इस्तेमाल से गाड़ी के डिरेलमेंट (यानी गाड़ी का पटरी से उतर जाना) की संभावना न के बराबर होती है। अभी ज्यादातर गाडियों में वैक्यूम ब्रेक लगे हैं। अगर कभी इमरजेंसी ब्रेक लगाना पड़े, तो गाड़ी साढ़े तीन सौ मीटर दूरी पर जाकर रूकती है। साथ ही वैक्यूम ब्रेक सिस्टम में कई बार गाड़ी के डिरेलमेंट होने का खतरा बना रहता है। वंदे भारत एक्सप्रेस को हवा रोधक बनाया गया है। इसकी बनावट ऐसी है कि सामने से हवा का दबाव इस पर ज्यादा असर नहीं डालता है। कोच को स्लीपरी बनावट दी गई है, इससे हवा गाड़ी के ऊपर से निकल जाती है। यह बनावट गाड़ी के स्पीड पकड़ने में भी मददगार साबित होती है।