रविवार को हुए कैबिनेट फेरबदल के बाद रेल मंत्रालय की कमान अब पीयूष गोयल के हाथों में सौंप दी गई है, जिनके सामने रेलवे को लेकर एक नहीं बल्कि कई चुनौतियां हैं। इन चुनौतियों में से सबसे महत्वपूर्ण है ट्रेनों की लेट लतीफी को दूर करना और केंद्र सरकार की 'स्वच्छ भारत योजना' को साकार करना। रेलवे बोर्ड ने इस दिशा में अपनी कमर कसते हुए तैयारियां शुरू कर दी है।
जानें, क्या है रेलवे बोर्ड का एजेंडा ?
रेल मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि रेलवे बोर्ड की पहली प्राथमिकता भारतीय रेल को साफ-सुथरा बनाने के साथ ट्रेन सिस्टम को तेज करना है। उन्होंने कहा कि इन दिनों रेलवे बोर्ड जिस एजेंडे पर काम कर रहा है, जिसमें अधिक से अधिक ट्रेनों को 'सुपरफास्ट' कैटेगरी में शामिल करना, जनवरी 2018 तक सभी कोच में बॉयो टॉयलेट लगाना, एक साल के भीतर सभी रेलवे नेटवर्क का इलेक्ट्रिफिकेशन, ट्रेन की गति बढ़ाने का साथ-साथ उनकी लेट लतीफी को दूर करना और रेल डिब्बों को पहले से बेहतर करना है।
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हार्ड टास्कमेकर माने जाते हैं पीयूष गोयल
खबरों के मुताबिक रेल मंत्री पीयूष गोयल के इस बयान के बाद ही रेलवे बोर्ड एक्शन में नजर आया और बोर्ड के चेयरमैन अश्वनी लोहानी ने बैठक बुलाई। इस दौरान बोर्ड के चेयरमैन ने अधिकारियों को खास निर्देश भी दिए। दरअसल, कैबिनेट मंत्री पीयूष गोयल को एक हार्ड टास्कमेकर माना जाता है इसलिए रेलवे के अधिकारियों ने उन्हें अपनी प्लानिंग का ब्लू प्रिंट दिखाने के लिए अपने-अपने काम तेज कर दिए हैं।
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फील्ड से जुड़े हुए 10 बड़े सुझाव
सूत्रों के मुताबिक हर रेलवे बोर्ड के मेंबर अपने-अपने फील्ड से जुड़े हुए 10 बड़े सुझाव तैयार कर रहे हैं, जिससे रेल सुविधाओं को पहले से बेहतर किया जा सके। सूत्रों के मुताबिक वर्तमान समय में रेलवे की योजना साल 2019-20 तक हर कोच में बॉयो टायलेट लगवाने की है लेकिन पीयूष गोयल इस जनवरी 2018 तक पूरा करवाना चाहते हैं।
आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रविवार को किए गए अपने मंत्रिमंडल के तीसरे फेरबदल में पीयूष गोयल को रेल मंत्री बनाया गया है। बताते चलें कि पिछले दिनों हुए रेल हादसों के बाद तात्कालिक रेल मंत्री सुरेश प्रभु और सरकार को लगातार आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा था।