अगर आप दिवाली और छठ पर घर जाने की तैयारी कर रहे है तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है। वरना आप घर जाने बजाए अस्पताल पहुंच सकते है। सबसे ज्यादा सतर्क स्पेशल ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों को रहने की जरूरत है। क्योंकि इसी ट्रेन को सबसे ज्यादा निशाना बनाया जाता है, आइए जानते हैं कि किस तरह बचाव की जरूरत आपको है।
दरअसल, भारतीय रेलवे ने दिवाली और छठ पर्व को ध्यान में रखते हुए यात्रियों के लिए कई स्पेशल ट्रेनें चलाने की घोषणा की है। इन ट्रेनों में पेंट्रीकार की सुविधा नहीं होती है। इसी वजह से सफर करने वाले यात्रियों को खाने पीने के लिए बहुत परेशानी होती है। सफर के दौरान इन यात्रियों के पास दो ही विकल्प होते है। पहला स्पेशल ट्रेन जिस स्टेशन पर रुके वहां से खाने पीने का सामान ले या फिर चलती ट्रेन में वेंडरों से खाना खरीदे।
आमतौर पर देखा जाता है कि,अवैध वेंडर ट्रेनों में स्टेशन के बजाए बीच में चढ़ते हैं और सामान बेचने के बाद बीच ट्रैक पर कहीं भी उतर जाते हैं। क्योंकि स्टेशन से चढ़ने या उतरने पर इन्हें पकड़े जाने डर होता है। ये वेंडर खराब गुणवत्ता वाला खाना यात्रियों को बेचते हैं। इसी वजह से खराब खाना की शिकायत नहीं कर पाते हैं। रेलवे की कार्रवाई में भी यह पकड़ में नहीं आते है। ऐसे में रेलवे ने स्पेशल ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों से कहा कि, यात्रियों चलती ट्रेन में वेंडर के बजाए स्टेशनों पर लगे अधिकृत रेलवे स्टॉल से खाना ले। अगर किसी स्टेशन पर ट्रेन का स्टाप कम समय के लिए है तो ऐसे में बड़े स्टेशन पर खड़े अधिकृति वेंडर से खाने-पीने का सामान खरीदे।
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रेलवे यात्रियों से की गई ये अपील
रेलवे ने यात्रियों से भी अपील है कि यदि ट्रेनों में व स्टेशनों पर किसी भी स्थान पर कोई भी व्यक्ति बिना यूनिफार्म व आई कार्ड के खाने-पीने की वस्तुओं को बेच रहा हो, तो उससे कोई भी खाने-पीने की वस्तु लेकर न लें। साथ ही, साथ ऐसे व्यक्ति की जानकारी ट्रेनों में व स्टेशनों पर मौजूद आरपीएफ को दें या 139 टोल फ्री नंबर पर कॉल करके भी बता सकते हैं। रेलवे के अधिकृत वेंडरों पास आई कार्ड होता है और वो प्रॉपर वर्दी में होते हैं। इनके पास मेडिकल कार्ड भी होता है, मांगने पर यह यात्री को दिखाते हैं। अगर यात्री को किसी वेंडर पर शक होता है तो तत्काल आई कार्ड या मेडिकल कार्ड मांग सकता है, जिससे उसकी पहचान हो जाएगी।
क्यूआर कोड बताएगा सब कुछ
रेलवे ने कैटरिंग के सभी ठेकेदारों, वेंडरों और हेल्पर्स के लिए ऐसे पहचान पत्र दिए है। इन पर एक क्यूआर कोड भी है। इसे क्यूआर कोड आधारित वेंडर मैनेजमेंट सिस्टम नाम दिया गया है। कोई भी यात्री अपने फोन से इस क्यूआर कोड को स्कैन करके उस वेंडर की सच्चाई जान सकता है। इस कोड को स्कैन करते ही वेंडर का नाम, पता, मोबाइल नंबर, आधार कार्ड नंबर, ठेकेदार का नाम और कंपनी का नाम जैसी जानकारी आपके फोन पर उपलब्ध हो जाएगी। यदि यह सब जानकारी मिलती है तो मतलब कि उससे आप खाने-पीने का सामान ले सकते हैं और क्वालिटी के बारे में भी श्योर हो सकते हैं।
क्यूआर कोड को स्कैन करके आप वेंडर का नाम, पता तो जान ही सकते हैं, इसके अलावा उनकी फोटो, पुलिस वेरिफिकेशन की तारीख, हेल्थ-फिटनेस सर्टिफिकेट, और कॉन्ट्रैक्ट की अवधि भी जान सकते हैं। इन सब जानकारियों के आधार पर आप पहचान सकते हैं कि वेंडर से कोई वस्तु लेना सुरक्षित रहेगा या असुरक्षित। साथ ही इसी क्यूआर कोड से वेंडर और ठेकेदार के बीच करार का डॉक्यूमेंट भी देखा जा सकता है।
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