तीन नए कृषि कानूनों की वापसी की मांग को लेकर शुरू हुए किसान आंदोलन में आज जगह-जगह ट्रेनें रोक दी गईं। आंदोलन का हरियाणा, पंजाब में व्यापक असर हुआ तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी कई जगहों पर ट्रेन सेवाएं प्रभावित हुईं। गाजियाबाद-हापुड़ में भी कई ट्रेनों को रोक दिया गया, जिससे यात्रियों को कुछ असुविधा का सामना करना पड़ा। हालांकि, इस दौरान किसी भी यात्री को किसी तरह से परेशान न होने का दावा किया गया है क्योंकि भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने पहले ही साफ कर दिया था कि किसान किसी भी यात्री को किसी प्रकार से नुकसान नहीं पहुंचाएंगे।
आंदोलन के बीच किसान नेता देश के राजनीतिक हालात पर भी पूरी नजर बनाए हुए हैं। पंजाब निगम चुनाव परिणामों को किसानों की जीत बताते हुए रविंदर सिंह ने कहा कि पंजाब के किसानों ने बता दिया है कि अब देश में केवल वही राज करेगा जो देश के किसानों की बात करेगा। किसानों का कहना है कि आज भाजपा और अकाली दल की जो स्थिति पंजाब में हुई है, वही हालत इन दलों को पूरे देश में भी देखना पड़ेगा।
आज किसानों की ताकत पूरी तरह ट्रेन रोको अभियान को सफल बनाने में लगी हुई थी। किसान जगह-जगह पर एकत्र होकर ट्रेनें चलाने में बाधा पैदा कर रहे थे। लिहाजा आंदोलन स्थलों पर आज किसानों की संख्या कुछ कम रही। हालांकि इस दौरान भी गाजीपुर बॉर्डर पर काफी संख्या में किसान जुटे हुए थे। किसान नेता अपने साथियों को आंदोलन के प्रति लगातार जागरूक कर रहे हैं।
कड़ाके की ठंड झेलने के समय किसानों के लिए अलाव का सहारा मिला था, जो अब लगभग खत्म हो चुका है। एक-दो जगहों पर ही अब सुबह के समय अलाव जलाये जाते हैं, जबकि किसान अभी से गर्मी की तैयारियों में जुट गए हैं। दोपहर के समय में कुछ गर्मी पड़ने लगी है। इस समय कुछ टेंट्स में पंखे भी चलने शुरू हो गए हैं। किसानों ने कहा कि वे तेज धूप का भी उसी तरह सामना करने के लिए तैयार हैं जैसा उन्होंने ठंड का किया था। लेकिन किसी भी स्थिति में वे कानून वापस होने से पहले दिल्ली से वापसी करने के लिए तैयार नहीं हैं।