रविवार रात गढ़ मुक्तेश्वर स्टेशन के पास दिल्ली फैजाबाद एक्सप्रेस (14206) के दुर्घटनाग्रस्त होने की जांच शुरू हो गई है।
प्रथमदृष्टया गर्मी के सीजन में रेलवे ट्रैक के चटकने को इस हादसे की मुख्य वजह बताया जा रहा है, लेकिन अभी उच्चस्तरीय जांच जारी है। अलीगढ़ का औसत तापमान 42 डिग्री तक पहुंच गया है तो रेल पटरी चटकने की आशंका बढ़ गई है। क्योंकि इस तापमान पर रेल पटरी के ऊपरी हिस्से का तापमान 8 से 10 डिग्री तक बढ़ कर 52 डिग्री पहुंच जाता है।
ट्रेन गुजरने पर ये तापमान 5 से 8 डिग्री तक और बढ़ कर 60 डिग्री तक हो जाता है। जिससे लोहे से बनी रेल पटरी फैल जाती है। इसी कारण से ट्रैक अचानक कहीं भी चटक सकता है। अलीगढ़ सेक्शन में (स्टार्ट प्वाइंट) 1324 किमी छर्रा अड्डा पुल से (इंड प्वाइंट) 1368 किमी खुर्जा स्टेशन तक तीनों ट्रैक पर रोजाना निरीक्षण हो रहा है।
लेकिन की मैन, ट्रैक मैन, गैंग मैन की कमी से इनकी निगरानी लगातार ठीक ढंग से नहीं हो पाती है। गुजरे दो साल में कई बार जनता ने ही ट्रैक के चटकने की सूचनाएं दी हैं। फिलहाल इस हादसे के बाद ट्रैक चटकने की घटनाओं को लेकर पूरे रेलवे में अलर्ट हो गया है।
रेल पथ इंजीनियरों को ट्रैक मैन, की मैन और गैंग मैन की गश्त बढ़ाने, रोजाना निरीक्षण करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। लेकिन लगातार कम होते जा रहे संसाधनों से मुसाफिरों को सुरक्षित सफर कैसे मिलेगा..? ये बड़ा सवाल है।
बयान-
इस गर्मी के सीजन में अभी तक कोई बड़ा फाल्ट नहीं मिला है। गर्मी में रेल पटरी फैलने और सर्दी में सिकुड़ने की वजह से ट्रैक चटकने की घटनाएं होती हैं। गर्मी की अपेक्षा सर्दी में रेलवे ट्रैक चटकने की घटनाएं ज्यादा होती है।
-बीके अग्रवाल, वरिष्ठ अभियंता निर्माण
ट्रैफिक लोड 152 फीसदी तक होने से यहां पर ट्रेनों की औसत स्पीड 70 से 80 किमी तक है। 100 किमी से ऊपर ट्रेन चलाने पर प्रतिबंध लगा है। लगातार निरीक्षण में ये स्पीड चेक होती रहती है।
-एआर खान, रिटायर स्टेशन अधीक्षक