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Bofors Scandal: 'अपने पद से इस्तीफा दे राहुल-सोनिया', बोफोर्स घोटाले में कांग्रेस पर एक बार हमलावर हुई भाजपा

Tue, 25 Mar 2025 03:45 PM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

बोफोर्स घोटाला एक बार फिर चर्चा में है। कारण है कि अब इस मामले में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति तेज हो गई है। जहां भाजपा नेता गौरव भाटिया ने इस घोटाले को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा है। साथ ही उन्होंने राहुल गांधी और सोनिया गांधी से उनके इस्तीफे की मांग भी की है।
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भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल के दौरान सबसे चर्चित और बड़ा घोटाला बोफोर्स घोटाल इन दिनों फिर से चर्चा का विषय बना हुआ है। जहां एक बार फिर इस मामले में भाजपा ने कांग्रेस पर पटलवार किया है। भाजपा नेता गौरव भाटिया ने बोफोर्स घोटाले को लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सोनिया गांधी और राहुल गांधी से सवाल किया। उन्होंने कहा कि सोनिया और राहुल को तब तक अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए, जब तक वे ओटावियो क्वात्रोची नामक व्यापारी और उनके परिवार के साथ अपने संबंधों का पूरी तरह से खुलासा नहीं करते। 

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साथ ही मामले में गौरव भाटिया ने ये भी दावा किया कि 1984 से 1988 के बीच इटली में भारत के राजदूत ने यह बयान दिया था कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का क्वात्रोची परिवार से बहुत करीबी संबंध था और वे इस घोटाले के मुख्य सूत्रधार थे। इसके अलावा, तत्कालीन CAG (कर्मचारी लेखा महानियंत्रक) ने भी यह कहा था कि बोफोर्स तोपों की खरीद में मूल्यांकन में गंभीर खामियां थीं।

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मामले में जांच की गतिविधियां तेज
बीते पांच मांर्च को मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अमेरिका को न्यायिक अनुरोध भेजकर निजी जांचकर्ता माइकल हर्शमैन से बोफोर्स मामले में जानकारी मांगी थी। हर्शमैन ने 64 करोड़ रुपये के बोफोर्स रिश्वत मामले के बारे में अहम जानकारी भारतीय एजेंसियों के साथ साझा करने की इच्छा जताई थी। 

बता दें कि फेयरफैक्स ग्रुप के प्रमुख हर्शमैन 2017 में निजी जासूसों के एक सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आए थे। इस दौरान उन्होंने विभिन्न प्लेटफॉर्म पर आरोप लगाया था कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने घोटाले की जांच को पटरी से उतार दिया था। उन्होंने कहा था कि वह सीबीआई के साथ जानकारी साझा करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने एक इंटरव्यू में दावा किया था कि उन्हें 1986 में केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने विदेशों में भारतीयों की ओर से मुद्रा नियंत्रण कानूनों के उल्लंघन और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच व भारत के बाहर ऐसी संपत्तियों का पता लगाने के लिए नियुक्त किया गया था। इनमें से कुछ बोफोर्स सौदे से संबंधित थे।
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समझिए, क्या था बोफोर्स घोटाला
चलिए अब आपको बोफोर्स घोटाला के बारे में विस्तार से बताते है। बोफोर्स घोटाला तब सामने आया जब भारत सरकार ने 155 मिमी बोफोर्स तोपों की खरीद के लिए 1986 में स्वीडन की बोफोर्स कंपनी के साथ समझौता किया था। इस घोटाले में मुख्य आरोप यह था कि बोफोर्स कंपनी ने भारतीय नेताओं और अधिकारियों को भारी रिश्वत दी थी ताकि वे इस सौदे को स्वीकृत कर सकें। साथ ही तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी और उनकी पत्नी सोनिया गांधी के करीबी दोस्त माने जाने वाले क्वात्रोच्चि पर इस सौदे में बिचौलिये की भूमिका निभाने का आरोप लगा था। इसके फलस्वरूप विपक्षी दलों ने कांग्रेस पर इस घोटाले को लेकर खुब निशाना साधा।खासकर सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर आरोप लगाए थे कि उनका बोफोर्स कंपनी के साथ गहरे रिश्ते थे। 

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