कांग्रेस पार्टी जीएसटी के मुद्दे को हर हाल में गुजरात चुनाव तक जिंदा रखना चाहती है। ताकि इसके जरिए वह गुजरात में दोबारा से अपने पैर जमा सके। इस प्रयास में कांग्रेस के जरिए तमाम दांव आजमाए जा रहे हैं।
मोदी सरकार के आर्थिक कदमों के खिलाफ मंगलवार को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को गुजरात में उतारने के बाद कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी नोटबंदी की सालगिरह के दिन 8 नवंबर को सूरत में कपड़ा व्यापारियों संग सीधा संवाद करेंगे।
उनके संवाद कार्यक्रम की तैयारियां सूरत में जोरों पर हैं। बीते एक सप्ताह में राहुल का यह दूसरा सूरत दौरा है। इससे पहले वो 3 नवंबर को भी सूरत गए थे और सभा को संबोधित किया था। लेकिन माना जा रहा है कि जीएसटी का सबसे विपरीत प्रभाव सूरत के कपड़ा व्यापारियों पर ही पड़ा है।
जीएसटी लागू होने के बाद कपड़ा व्यापारियों ने लगातार 17 दिनों तक विरोध-प्रदर्शन कर जीएसटी के खिलाफ आंदोलन चलाया था। उस दौरान उन पर पुलिस लाठीचार्ज और आंदोलन दमन की तमाम कवायदें स्थानीय पुलिस-प्रशासन के जरिए हुई थी। जिसके वजह से कपड़ा व्यापारियों में अब भी भाजपा के खिलाफ गुस्सा बरकरार है। यही वजह है कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी बार-बार सूरत की ओर रूख कर रहे हैं।
पीएम मोदी के मन की बात के तर्ज पर राहुल का संवाद
पीएम मोदी के मन की तर्ज पर कांग्रेस ने अपने नेता राहुल गांधी के लिए गुजरात में सीधे संवाद का कार्यक्रम बनाया है। पीएम मोदी की मन की बात वैसे तो रेडियो के जरिए होती है।
लेकिन कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी जनता के बीच बैठकर उनकी समस्याओं को सुनेंगे। इस कवायद में सूरत कांग्रेस ने नोटबंदी की सलगिरह के दिन कपड़ा व्यापारियों संग राहुल का पहला संवाद कार्यक्रम बनाया है।
पिछले तीन दिनों से स्थानीय कांग्रेसी व्यापारियों के बीच जाकर उन्हें राहुल के संवाद कार्यक्रम का निमंत्रण थमा रहे हैं। ताकि राहुल के संवाद में कपड़ा व्यापारियों की भारी संख्या उपस्थित रहे। अब राहुल गांधी बुधवार 8 नवंबर को सूरत पहुंचकर कपड़ा व्यापारियों के बीच उपस्थित होकर उनसे सीधा संवाद करेंगे और उनकी समस्याएं सुनेंगे।
इस बीच सरकार ने भी जीएसटी के असर को कम करने के लिए 10 नवंबर को होने वाली जीएसटी काउंसिल की बैठक में और बड़ी राहत देने की तैयारी की है। मगर कांग्रेस की रणनीति चुनाव तक जीएसटी के मुद्दे को गर्माए रखने की है।
ताकि जीएसटी के कदम से व्यापारियों में पनपी नाराजगी को वह वोट के रूप में भुना सकें। इस बीच सूरत के कपड़ा व्यापारियों में कांग्रेस की बढ़ती गतिविधियों को देख भाजपा ने भी अपनी चहलकदमी शुरू कर दी है। बडे नेताओं से पहले स्थानीय स्तर के नेता ही कपड़ा व्यापारियों के बीच जाकर मिलने-जुलने का अभियान चला रहे हैं। ताकि व्यापारियों के बीच पनपे असंतोष को कम कर सकें।