संसद के मानसून सत्र के तीसरे दिन लोकसभा में मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर बहस को लेकर अब सब कुछ तय हो गया है। लोकसभा अध्यक्ष की ओर से सभी पार्टियों को उनकी संख्या के आधार पर समय बांट दिया गया है। वहीं, भाजपा ने पार्टी की ओर से लोकसभा में बोलने वाले वक्ताओं की सूची जारी कर दी है।
लेकिन इस अविश्वास प्रस्ताव की चर्चा के दौरान सबको इंतजार होगा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के बोलने का। 18 अप्रैल 2018 को राहुल ने अमेठी में कहा था कि यदि उन्हें संसद में 15 मिनट भी बोलने दिया जाए तो भूकंप आ जाएगा। तब से अब लगभग तीन महीने बाद यह पहली बार होगा जब राहुल गांधी लोकसभा में बोलेंगे। यानी राहुल गांधी के पास मोदी को चुनौती देने का यह पहला मौका होगा।
दरअसल, आज लोकसभा स्पीकर ने जो कांग्रेस के लिए समय निर्धारित किया है, उसके हिसाब से राहुल गांधी को लगभग 38 मिनट तक बोलने का मौका मिल सकता है। यानी राहुल गांधी और कांग्रेस को केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री मोदी को घेरने का पूरा समय मिलेगा। वो पहले कई बार कह चुके हैं उनका भाषण तैयार है, लेकिन संसद में उन्हें बोलने से रोका जा रहा है। राहुल गांधी ने कहा था 'अगर मुझे संसद में बोलने दिया गया तो भूकंप आ जाएगा।'
राहुल गांधी ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान एक बार नहीं, कई बार यह बात दोहराई थी कि उन्हें मोदी सरकार संसद में 15 मिनट बोलने का समय नहीं दे रही है। दरअसल, राहुल गांधी काफी समय से मोदी सरकार को जीएसटी, नोटबंदी, बेरोजगारी और कई विभिन्न मुद्दों पर घेरना चाह रहे हैं। इसकी बात वह कई मंचों से कई बार कर चुके हैं। हालांकि, राहुल गांधी के भूकंप वाले बयान पर भाजपा तंज भी कस चुकी है।
भाजपा की अपनी संख्या ही 273 है, इसमें लोकसभा अध्यक्ष भी शामिल हैं। एआईएडीएमके के 37 सांसदों को भी मिला लें तो ये संख्या 334 हो जाती है। यानी बहुमत से 66 ज्यादा। इसका एक ही मतलब है कि विपक्ष भी ये जानता है कि उसकी हार तय है। लेकिन सदन में ये देखा जाएगा कि कौन सा नेता अपनी बातों को जनता के सामने अच्छी तरह रखता है? राहुल गांधी समेत पूरे विपक्ष के सामने ये चुनौती होगी कि वो जनता के सामने अपने नंबर कैसे बढ़ाते हैं। वहीं सरकार के सामने ये चुनौती होगी कि वो विपक्ष के आरोपों का क्या जवाब देती है।
गौरतलब है कि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को प्रस्ताव पर अपने विचार रखने के लिए 38 मिनट का समय दिया गया है। अन्य विपक्षी दल अन्नाद्रमुक, तृणमूल कांग्रेस, बीजू जनता दल (बीजद), तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) को क्रमश: 29 मिनट, 27 मिनट, 15 मिनट और नौ मिनट का समय दिया गया है। सत्तारूढ़ भाजपा को चर्चा में तीन घंटे और 33 मिनट का समय दिया गया है।