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Rahul Vs Bittu: राहुल गांधी के बयान पर भड़की BJP, कहा- बिट्टू को गद्दार कहना सिख धर्म का अपमान

Wed, 04 Feb 2026 03:05 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

संसद के छठे दिन संसद परिसर में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की तरफ से केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को गद्दार कहा गया। इसे लेकर भाजपा ने उनपर सिख धर्म का अपमान करने का आरोप लगाया है। वहीं केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि रवनीत सिंह बिट्टू एक सिख परिवार से आते हैं जिसने देश की सेवा की है, राहुल गांधी की गद्दार वाली टिप्पणी अस्वीकार्य है।
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राहुल की टिप्पणी पर बरसे भाजपा नेता - फोटो : वीडियो ग्रैब
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विस्तार
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संसद में आज विपक्ष के नेता राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के बीच तीखी झड़प देखने को मिली। विपक्ष के मकर द्वार पर प्रदर्शन के दौरान जब रवनीत सिंह बिट्टू वहां से गुजर रहे थे तो कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने उनपर टिप्पणी की और उन्हें गद्दार कह दिया। इस दौरान रवनीत सिंह बिट्टू पीछे नहीं रहे, उन्होंने राहुल गांधी को देश का दुश्मन कहा। अब इस मामले पर भाजपा नेताओं की तरफ से प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई है।
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यह भी पढ़ें - Video: 'मेरे गद्दार दोस्त', केंद्रीय मंत्री को देख राहुल का तंज, रवनीत बिट्टू का पलटवार; बताया 'देश का दुश्मन'

राहुल पर सिख धर्म का अपमान करने का आरोप
भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, दिल्ली के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा, भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सरदार आरपी सिंह और भाजपा विधायक अरविंदर सिंह लवली ने संयुक्त रूप से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। जिसमें उन्होंने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर सिख धर्म का अपमान करने का आरोप लगाया है। इस दौरान केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि रवनीत सिंह बिट्टू एक सिख परिवार से आते हैं जिसने देश की सेवा की है, राहुल गांधी की गद्दार वाली टिप्पणी अस्वीकार्य है।
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'राहुल गांधी रवनीत बिट्टू के पार्टी छोड़ने से नाराज'
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस दौरान कहा कि इस शब्द का प्रयोग हल्के में नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि इसका अर्थ है देश के साथ विश्वासघात करने वाला। यह सिख समुदाय के लिए एक गंभीर मुद्दा है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी रवनीत बिट्टू के पार्टी छोड़ने से नाराज हैं, लेकिन उन्होंने उनसे यह भी कहा कि आप वापस आएंगे। सिर्फ इसलिए कि एक पगड़ीधारी व्यक्ति आपकी पार्टी छोड़ देता है, आप उसे गद्दार कह देते हैं। हरदीप पुरी ने कहा, 'हम यहां सिर्फ भाजपा के सदस्य बनकर नहीं, बल्कि सिख समुदाय के गौरवान्वित और गहरे आहत सदस्य बनकर आए हैं। आज संसद के बाहर, जब हमारे सहयोगी और भाजपा मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू उस जगह से गुजर रहे थे जहां राहुल गांधी और उनके साथी विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, तो उनके खिलाफ नारे लगाए गए। मैं माफी मांगना चाहता हूं, क्योंकि ऐसे शब्दों का अंग्रेजी में अनुवाद करने पर उनका भाव और बारीकियां अक्सर खो जाती हैं। इस्तेमाल किया गया शब्द था गद्दार। हालांकि इसका आम तौर पर अनुवाद गद्दार के रूप में किया जाता है, लेकिन इससे पूरा अर्थ व्यक्त नहीं होता। गद्दार वह होता है जो देश के साथ विश्वासघात करता है- जो देश या उसके रहस्यों को बेच देता है। इस शब्द का हल्के में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए… लेकिन रवनीत सिंह बिट्टू कौन हैं? वे सिर्फ लुधियाना से चुने गए सांसद नहीं हैं। वे सिर्फ एक ऐसे सिख परिवार से नहीं हैं जिसने देश की सेवा की है। उनके परिवार ने बलिदान दिए हैं, ऐसे व्यक्ति को गद्दार कहना अस्वीकार्य है। किसी भी समुदाय के किसी भी व्यक्ति को गद्दार कहना अस्वीकार्य है। संसद के अंदर और बाहर दोनों जगह संसदीय चर्चा शालीनता और सभ्य भाषा पर आधारित होनी चाहिए।'
 

'वे सिखों को गाली देने के आदी हैं'
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा विधायक अरविंदर सिंह लवली ने कहा, 'यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस व्यक्ति के दादा ने इस देश की एकता और अखंडता के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी, उसे देशद्रोही बताया जा रहा है, जबकि जो लोग देश को टुकड़ों में तोड़ने की बात करते हैं, उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है... समस्या यह है कि कुछ लोग अभी भी सामंती, शाही मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाए हैं। कुछ परिवार अभी भी खुद को हकदार समझते हैं और खुद को इस देश का मालिक मानते हैं। वे उस सोच से ऊपर नहीं उठ पा रहे हैं। उनका मानना है कि सोचने और काम करने का सिर्फ उनका तरीका ही सही है, और यह दुर्भाग्यपूर्ण है। मैं यह बहुत साफ कहना चाहता हूं- यह पहली बार नहीं है। मुझसे बेहतर यह कोई नहीं जानता, यह व्यवहार उनकी आदत है। वे सिखों को गाली देने के आदी हैं और किसी भी सिख का अपमान करने का कोई मौका नहीं छोड़ते। यह वही लोग थे जिन्होंने एक समय इस देश में 'कमजोर प्रधानमंत्री' का नैरेटिव बनाया था... आज, आप हाथों में संविधान लेकर घूमते हैं और दावा करते हैं कि आप इसकी रक्षा करेंगे। लेकिन एक मंत्री जो भारत सरकार में संविधान के तहत काम कर रहा है, अगर आप उसे 'देशद्रोही' कह रहे हैं, तो इसका क्या औचित्य हो सकता है?... अब तक, इस देश के लोग कहते थे कि यह व्यक्ति राजनीति के लिए फिट नहीं है। आज की घटना के बाद, देश के लोग कहेंगे कि वह संसद सदस्य होने की गरिमा बनाए रखने या सदन की मर्यादा का सम्मान करने के भी लायक नहीं है।'
 

'राहुल गांधी का आज का व्यवहार शर्मनाक'
वहीं इस मामले में भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता जयवीर शेरगिल ने कहा कि, 'राहुल गांधी के अनुसार, देश की सेवा करने वाला हर व्यक्ति गद्दार है और उनके चरणों में गिरने वाला वफादार। सरदार रवनीत सिंह बिट्टू को गद्दार कहकर राहुल गांधी ने पूरे सिख समुदाय का अपमान किया है, एक बार फिर अपनी सिख-विरोधी मानसिकता, अपनी अकड़ और घटियापन का प्रदर्शन किया है और एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे विपक्ष के नेता बनने के लायक नहीं हैं। राहुल गांधी को यह नहीं भूलना चाहिए कि सिख समुदाय ही हमेशा से देश की रक्षा और सेवा करता आया है, उनके विपरीत, जो सेना पर सवाल उठाते हैं, देश को बदनाम करते हैं और पाकिस्तानी अखबारों में हीरो बनने के लिए हमेशा तरसते रहते हैं। संसद में राहुल गांधी का आज का व्यवहार शर्मनाक, घृणित और विपक्ष के नेता के लिए अशोभनीय है।'
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भाजपा ने याद दिलाया 1984 का दंगा
इस पूरे विवाद को लेकर भाजपा की तरफ से सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट किया गया है। जिसमें लिखा गया- राहुल गांधी द्वारा एक सिख मंत्री को 'देशद्रोही' कहना कोई अलग-थलग घटना नहीं है। यह सिख समुदाय के प्रति कांग्रेस के रवैये में एक गहरी, चिंताजनक निरंतरता को उजागर करता है। हमें इतिहास को नहीं भूलना चाहिए। 1984 में, राजीव गांधी की कांग्रेस सरकार के शासनकाल में, भारत की सड़कों पर हजारों सिखों की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। घर जला दिए गए। परिवार तबाह हो गए। दशकों तक न्याय नहीं मिला। कांग्रेस नेतृत्व ने आंखें मूंद लीं और अपराधियों को संरक्षण दिया। और आज, उसी पार्टी का नेता एक बार फिर एक सिख की निष्ठा पर सवाल उठा रहा है, इस बार संसद में।

राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी माफी मांगे- भाजपा
लाखों सिख भारतीय सशस्त्र बलों में सम्मान के साथ सेवा करते हैं। उन्होंने 1947 से लेकर कारगिल युद्ध और उसके बाद तक भारत के लिए अपना खून बहाया है। एक सिख को "देशद्रोही" कहना हर सिख सैनिक, हर शहीद, हर उस परिवार का अपमान है जिसने इस राष्ट्र के लिए बलिदान दिया है। वह पार्टी जो 1984 में सिखों की रक्षा करने में विफल रही, अब उन्हें देशभक्ति पर उपदेश देने का साहस करती है। बिना त्याग किए विशेषाधिकार प्राप्त करने वाला नेता उन लोगों की निष्ठा पर सवाल उठाता है जो भारत की रक्षा के लिए अपनी जान कुर्बान करते हैं। भारत अपने सिख भाइयों और बहनों के प्रति इस तरह के अपमान को बर्दाश्त नहीं करेगा। राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी को माफी मांगनी चाहिए।
 

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