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क्या इंस्टाग्राम से गायब हुई राहुल-विजय की रील?: कांग्रेस ने सरकार पर लगाया आरोप, मंत्रालय ने कही ये बात

Sun, 10 May 2026 11:34 PM IST
राकेश कुमार पीटीआई, नई दिल्ली।

सार

राहुल गांधी और विजय की वायरल रील को ब्लॉक किए जाने पर कांग्रेस और सरकार आमने-सामने हैं। जहां कांग्रेस इसे राजनीतिक साजिश बता रही है, वहीं सरकार ने इसे प्लेटफॉर्म की तकनीकी गलती बताकर पल्ला झाड़ लिया है। क्या है पूरा मामला? खबर में जानिए...
 
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राहुल गांधी और तमिलनाडु के सीएम विजय - फोटो : @RahulGandhi
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विस्तार
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नई दिल्ली में राजनीतिक पारा चढ़ गया है। कांग्रेस ने दावा किया कि राहुल गांधी और अभिनेता-राजनेता विजय की एक रील और फोटो पोस्ट को इंस्टाग्राम ने ब्लॉक कर दिया है। राहुल गांधी तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में विजय के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने चेन्नई पहुंचे थे। वहां की तस्वीरें साझा करते ही सोशल मीडिया पर रिकॉर्ड तोड़ व्यूज आने लगे। कांग्रेस का आरोप है कि इस लोकप्रियता से घबराकर आईटी मंत्रालय के नियमों का हवाला देकर पोस्ट को रोका गया।
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कांग्रेस ने लगाया सरकार पर लगाया साजिश का आरोप
राहुल गांधी के करीबी श्रीवत्स ने एक्स पर जानकारी दी कि इस रील को एक घंटे से भी कम समय में 12 मिलियन व्यूज मिल चुके थे। वहीं, फोटो पोस्ट करीब 46 मिलियन लोगों तक पहुंच चुकी थी। श्रीवत्स का आरोप है कि मेटा ने ब्लॉक करने का कोई ठोस कारण नहीं बताया। उन्होंने इसे सीधे तौर पर आईटी नियमों का असर बताया। कांग्रेस का कहना है कि राहुल गांधी की सोशल मीडिया पहुंच को लंबे समय से दबाया जा रहा है। उनके यूट्यूब व्यूज और फॉलोअर्स को भी निशाना बनाया जा रहा है।



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आईटी मंत्रालय ने क्या कहा?
दूसरी ओर, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। मंत्रालय के अनुसार, इंस्टाग्राम के अपने आंतरिक सिस्टम ने गलती से इन पोस्ट्स को ब्लॉक कर दिया था। यह एक ऑटोमेटेड सिस्टम की चूक थी, जिसे अब ठीक कर लिया गया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि विपक्ष के नेता की आवाज दबाने का दावा पूरी तरह गलत है। कांग्रेस इसे लोकतंत्र में विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास बता रही है। वहीं, सरकार इसे महज एक तकनीकी ग्लिच करार दे रही है। खबर है कि अब पोस्ट को बहाल कर दिया गया है, लेकिन डाटा और रीच को लेकर बहस थमने का नाम नहीं ले रही है। इस घटना के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की निष्पक्षता पर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।

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