राहुल गांधी के इंदौर भाषण में मध्य प्रदेश की भर्ती प्रक्रिया और 4.87 लाख पद लंबित होने के दावे पर ‘झूठ की गूंज’ हैंडल ने सवाल उठाए हैं। पोस्ट में 87:13 व्यवस्था, ओबीसी आरक्षण विवाद और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की अंतरिम व्यवस्था का हवाला दिया गया है। इसी बीच भाजपा महासचिव विनोद तावड़े ने डूसू चुनाव में एबीवीपी की जीत को ‘राष्ट्रवाद की विजय’ बताया और छात्र संगठनों के प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया दी।
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के इंदौर कार्यक्रम में दिए गए बयान को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ‘झूठ की गूंज’ नाम के हैंडल ने फैक्ट-चेक का दावा किया है। हैंडल ने राहुल गांधी के मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़े आरोपों को गलत बताया है।‘झूठ की गूंज’ की पोस्ट के मुताबिक राहुल गांधी का यह दावा सही नहीं है कि पिछले आठ वर्षों में एमपीपीएससी की सभी भर्ती प्रक्रियाओं में 13 प्रतिशत पद रोक दिए गए और इसके कारण 4.87 लाख पद लंबित हैं। पोस्ट में इस दावे के समर्थन में 87:13 व्यवस्था से जुड़े सरकारी प्रावधानों का उल्लेख किया गया है।
विज्ञापन
87:13 फॉर्मूला कब लागू हुआ?
पोस्ट में दावा किया गया है कि 87:13 का फॉर्मूला पिछले आठ वर्षों से लागू नहीं था। इसके अनुसार, मध्य प्रदेश सामान्य प्रशासन विभाग का संबंधित परिपत्र 29 सितंबर 2022 को जारी हुआ था। इसलिए इसे पिछले आठ वर्षों की सभी भर्ती प्रक्रियाओं पर लागू मानना सही नहीं होगा। ‘झूठ की गूंज’ के मुताबिक विवाद की शुरुआत 2019 में तत्कालीन कमलनाथ सरकार द्वारा अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किए जाने के बाद हुई। इसके बाद आरक्षण से जुड़ा मामला अदालत में पहुंचा और भर्ती प्रक्रियाओं में कुछ पदों को लेकर अंतरिम व्यवस्था अपनाई गई।
87 प्रतिशत पदों पर नियुक्तियां जारी रहने का दावा
पोस्ट में कहा गया है कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह से नहीं रोकी गई थी। दावे के अनुसार, 87 प्रतिशत पदों पर नियुक्तियां जारी रहीं, जबकि शेष 13 प्रतिशत पदों के लिए अलग-अलग अंतरिम सूचियां तैयार की गईं, ताकि अदालत के अंतिम फैसले के अनुरूप नियुक्तियां की जा सकें।
विज्ञापन
हाईकोर्ट की अंतरिम व्यवस्था का हवाला
फैक्ट-चेक पोस्ट में जनवरी 2025 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की अंतरिम व्यवस्था का भी उल्लेख किया गया है। इसमें दावा किया गया कि अदालत ने 87:13 फॉर्मूले को अंतरिम तौर पर बरकरार रखा था और विभिन्न भर्तियों में करीब 10 हजार पद इस व्यवस्था से प्रभावित हुए थे। ‘झूठ की गूंज’ ने करीब 10 हजार प्रभावित पदों के आंकड़े को राहुल गांधी के 4.87 लाख लंबित MPPSC पदों के दावे से अलग बताया है। यानी पोस्ट के अनुसार, दोनों आंकड़ों और उनके संदर्भ को एक समान नहीं माना जा सकता।
विनोद तावड़े ने राहुल गांधी पर साधा निशाना
इसी राजनीतिक विवाद के बीच भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े ने एक्स पर राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने ‘झूठ की गूंज के सामने राष्ट्रवाद की विजय’ लिखते हुए डीयू छात्रसंघ चुनाव में एबीवीपी की जीत का उल्लेख किया। तावड़े ने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में तीन सीटों पर एबीवीपी की जीत के लिए कार्यकर्ताओं को बधाई दी। उन्होंने दावा किया कि डीयू के अधिकांश कॉलेजों में भी एबीवीपी ने सभी पैनलों पर क्लीन स्वीप करते हुए प्रदर्शन किया है।
छात्रहित में काम जारी रखने की बात
विनोद तावड़े ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि एबीवीपी कार्यकर्ता स्वामी विवेकानंद के आदर्शों पर चलते हुए छात्रहित में काम करते रहेंगे। वहीं, राहुल गांधी के बयान और ‘झूठ की गूंज’ के दावों पर कांग्रेस की ओर से इस संबंध में कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।