कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा है कि मोदी सरकार के इस फैसले ने एक बार फिर दिखाया है कि उन्हें आम लोगों की कम चिंता है। सरकार के इस फैसले से किसान, छोटे दुकानदार और घरेलू महिलाएं में इसे लेकर अफरातफरी है।
राहुल गांधी ने कटाक्ष करते हुए लिखा है कि विदेशों में कालाधन, रियल एस्टेट और सोने रकम लगाने वाले अच्छी गुनहगार पकड़ से बाहर हैं। उन्होंने सरकार से सवाल पूछा है कि एक हजार के नोट को दो हजार रुपए के नोट में बदलने से कालेधन की जमाखोरी को बहुत मुश्किल बनाने में किस प्रकार की मदद मिलेगी।
वहीं पूर्व वित्त मंत्री पी.चिदंबरम का कहना है कि पूरा देश ब्लैकमनी लॉर्डिंग में लिप्त नहीं है। सरकार ने पांच सौ और एक हजार के नोट पर पाबंदी का फैसला लिया है। इस फैसले से अगर दैनिक वेतनभोगी और छोटे कामकाजी लोगों की दिनचर्या में दिक्कतें आती हैं और सामान्य लोगों को नोट बदलवाने में प्रताडना का सामना करना पड़ा तो कांग्रेस निंदा और विरोध करेगी। वहीं अर्थ व्यवस्था की मजबूती, काले धन पर चोट के उद्देश्य से अगर फैसला लिया है और देश को इसका लाभ होता है तो हमें खुशी होगी और समर्थन करते हैं।
चिदंबरम ने कहा कि अधिक मूल्य वाले नोटों का विमुद्रीकरण 1978 में जनता सरकार के समय भी हुआ था। तब ये उद्देश्य सफल नहीं हो पाया था और फिर दोबारा अधिक मूल्य के नोट बाजार में आ गए। पांच सौ और हजार के नोटों का प्रसार 86.4 है। विमुद्रीकरण की प्रक्रिया सरकार के सामने सबसे बड़ी परीक्षा है। पुराने नोट के बदले नए नोट तय समय में बाजार में आ जाएं इसकी जिम्मेदारी रिजर्व बैंक और अन्य बैंकों की होगी। वहीं 15 नवंबर से देश में विवाह समारोह शुरू होने हैं ऐसे में लोगों ने रकम बैंक से निकाली हैं अब उसे जमा करना होगा जबकि उतनी मात्रा में पर्याप्त धन नहीं मिलेगा।
नई मुद्रा को उतारने में 15 से 20 हजार करोड़ की लागत आई है। सरकार कालेधन को लेकर जो लाभ मानकर चल रही है विमुद्रीकरण से वो शायद इससे कम होगा। नए नोटों के आने पर सबसे ज्यादा नुकसान छोटे तबके के लोगों, छात्रों, घरेलू महिलाओं ओर स्वरोजगार वालों का होगा। 40 साल पहले जाना मुश्किल है। एक हजार का नोट बंद करने का तर्क है तो दो हजार को नया नोट काले धन को कैसे रोकेगा। पांच सौ का नोट अधिक मूल्य का था और आज भी है।
पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार के इस फैसले की परीक्षा तीन मानकों पर होगी। उनका कहना है कि वर्तमान में सकल घरेलू उत्पाद जीडीपी अनुपात 12 फीसदी है। क्या ये गिरकर दुनिया के औसत का चार फीसदी हो जाएगा। दूसरा इस समय पांच सौ और हजार के नोट 15 लाख करोड़ की तरल मुद्रा में है क्या इसकी कीमत कम हो जाएगी। तीसरा क्या सोने का आयात दिखाता है कि अनगिनत धन अब सोने के जेवर के रूप में बदलेगा।