कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि उद्यमियों से चर्चा के दौरान एक और विचार सामने आया कि नए कारोबारियों के लिए बैंकिंग व्यवस्था को सुलभ बनाया जाए। उन्होंने सवाल किया कि सिर्फ नीरव मोदी को ही हजारों करोड़ रुपये क्यों मिलने चाहिए? उसने भारत में कितनी नौकरियां पैदा की हैं? अगर कोई नौजवान कारोबार शुरू करना चाहता है और दो हजार नौकरियां सृजित करना चाहता है तो उसे बैंक ऋण क्यों नहीं मिल सकता?
गांधी ने कहा कि समाज के विभिन्न समूहों से विचार-विमर्श करने के बाद चुनावी घोषणापत्र तैयार हो रहा है जिसमें कारोबार, खेती, रोजगार सृजन को बढ़ावा देने की बातें शामिल होंगी। वहीं कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि अप्रैल के पहले सप्ताह में पार्टी का चुनाव घोषणापत्र जारी किया जा सकता है। पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की अध्यक्षता वाली समिति घोषणापत्र को अंतिम रूप दे रही है।
नोटबंदी को लेकर प्रधानमंत्री पर तंज कसते हुए गांधी ने कहा कि हम जल्दबाजी में नहीं हैं। हम विशेषज्ञों से विचार-विमर्श किए बिना, नोटबंदी और जीएसटी जैसे कदम नहीं उठा सकते। हमने विचार-विमर्श किया और परखा भी है। उन्होंने कहा कि गरीबी उन्मूलन ही एक बड़ी परियोजना है और इसके लिए दशकों तक सतत कार्य हुआ। आजादी के बाद से कांग्रेस गरीबी उन्मूलन के कदम उठाने में अग्रणी रही है।