गंगा रक्षा अभियान में कई वर्षों से प्रो. जीडी अग्रवाल के सहयोगी रहे भारतीय जनता पार्टी के पूर्व नेता केएन गोविंदाचार्य ने कहा कि उनके निधन पर कहा कि बहुत कम मदद मिली, वह भी बहुत देर से। गोविंदाचार्य ने कहा कि करीब दो हफ्ते पहले गंगा अभियान की प्रभारी रही केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने उनसे मुलाकात की और उनसे अनशन खत्म करने का अनुरोध किया था। भारती ने उनकी बात केंद्र सरकार तक पहुंचाने का वादा किया। लेकिन अग्रवाल ने कोई ठोस कार्रवाई न होने तक अनशन खत्म करने से इनकार कर दिया।
दिल्ली लौटकर उमा भारती ने केंद्रीय जल संसाधन विकास मंत्री नितिन गडकरी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर अग्रवाल की बिगड़ते स्वास्थ्य से अवगत कराया। आखिर में गंगा में पर्यावरणीय बहाव (इकोलॉजिकल फ्लो) बनाए रखने का फैसला किया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
उन्होंने कहा कि उनकी मांग न सिर्फ अविरल प्रवाह बनाए रखने की मांग कर रहे थे बल्कि इस पर बन रहे सभी हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट और रेत का खनन रोकने की मांग भी कर रहे थे। वे गंगा की रक्षा के लिए संसद का संयुक्त सत्र बुलाए जाने और उससे पहले एक अध्यादेश पारित करने की मांग भी कर रहे थे। लेकिन जिस सरकार ने गंगा की रक्षा के लिए स्वतंत्र मंत्रालय बनाया, वही प्रोफेसर अग्रवाल की जान की रक्षा नहीं कर सकी।