बता दें कि 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल घोषित कर दिया था। यह मार्च 21 मार्च 1977 तक यानी 21 महीने चला था। आपातकाल की घोषणा के साथ ही सभी नागरिकों के मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए थे। 25 जून की रात से ही देश में विपक्ष के नेताओं की गिरफ्तारियों का दौर शुरू हो गया था। जयप्रकाश नारायण, लालकृष्ण आडवाणी, अटल बिहारी वाजपेयी, जॉर्ज फर्नांडिस आदि बड़े नेताओं को जेल में डाल दिया गया था।
आपातकाल लागू के बाद प्रशासन और पुलिस द्वारा किए गए उत्पीड़न की कई खबरें सामने आई थीं। इस दौरान मीडिया पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया था। सरकार ने हर समाचार पत्र के कार्यालय में सेंसर अधिकारी बैठा दिए थे। स्पष्ट आदेश था कि अधिकारी की अनुमति के बिना कोई समाचार प्रकाशित नहीं हो सकता था। सरकार विरोधी समाचार प्रकाशित करने पर गिरफ्तारी हो सकती थी। यह सब तब रुका, जब 23 जनवरी 1977 को मार्च में चुनाव की घोषणा कर दी गई।
1971 के चुनाव में इंदिरा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने जबरदस्त जीत हासिल की थी। लेकिन, इंदिरा की जीत पर सवाल उठाते हुए उनके प्रतिद्वंद्वी राजनारायण अदालत पहुंच गए थे। इंदिरा गांधी के खिलाफ रायबरेली लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने वाले संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के प्रत्याशी राजनारायण ने उन पर चुनाव जीतने के लिए गलत तरीकों का प्रयोग करने का आरोप लगाया था। मामले में चुनाव को निरस्त कर दिया गया और इसी के चलते उन्होंने आपातकाल लगा दिया था।