प्रयागराज: 'ऑक्सफोर्ड ऑफ द ईस्ट' और IAS की नर्सरी
राहुल की यात्रा का दूसरा प्रमुख पड़ाव प्रयागराज है। 1887 में स्थापित इलाहाबाद विश्वविद्यालय भारत के सबसे पुराने आधुनिक विश्वविद्यालयों में गिना जाता है। इसकी शैक्षणिक प्रतिष्ठा के कारण इसे लंबे समय तक 'ऑक्सफोर्ड ऑफ द ईस्ट' कहा जाता रहा।
इलाहाबद से निकले कई बड़े राजनीतिक चहरे
- इलाहाबाद विश्वविद्यालय से निकलने वाले छात्रों ने देश की राजनीति, प्रशासन और शासन व्यवस्था को दशकों तक दिशा दी।
- भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा, पूर्व प्रधानमंत्री गुलजारी लाल नंदा, विश्वनाथ प्रताप सिंह और चंद्रशेखर इसी विश्वविद्यालय के छात्र रहे।
- वी.पी. सिंह और नारायण दत्त तिवारी विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष भी रहे, जबकि चंद्रशेखर ने यहीं से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की।
- पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा, विजय बहुगुणा, रीता बहुगुणा जोशी, मुरली मनोहर जोशी, मदन लाल खुराना, अर्जुन सिंह, मुख्तार अब्बास नकवी और जनेश्वर मिश्र जैसे अनेक राष्ट्रीय नेता भी इसी विश्वविद्यालय से जुड़े रहे। इतना ही नहीं, नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री समेत कई अंतरराष्ट्रीय हस्तियों ने भी यहां शिक्षा प्राप्त की।
प्रयागराज को आज भी उत्तर भारत की प्रतियोगी परीक्षाओं का बड़ा केंद्र माना जाता है। शहर और इसके आसपास के नैनी, झूंसी व फाफामऊ जैसे इलाकों में लगभग पांच लाख छात्र विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक यहां करीब 2,000 कोचिंग संस्थान संचालित हैं, जहां पूर्वी उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड से बड़ी संख्या में छात्र पहुंचते हैं। अपेक्षाकृत कम खर्च में कोचिंग और रहने की सुविधा उपलब्ध होने के कारण प्रयागराज UPSC, PCS, SSC, रेलवे, बैंकिंग और पुलिस भर्ती परीक्षाओं के अभ्यर्थियों के लिए एक प्रमुख केंद्र है। यही वजह है कि इसे अक्सर देश की 'IAS-PCS की नर्सरी' भी कहा जाता है।
दिल्ली: प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी की भी राजधानी
राहुल गांधी के अभियान का अंतिम पड़ाव दिल्ली है। भारत की राजधानी दिल्ली केवल राजनीतिक शक्ति का केंद्र नहीं है, बल्कि देश की सबसे महत्वपूर्ण शैक्षणिक और प्रतियोगी परीक्षा राजधानी भी मानी जाती है।
- इसकी शैक्षिक विरासत मध्यकालीन दौर से शुरू होती है, जब दिल्ली सल्तनत और मुगल शासन के दौरान यहां मदरसों, पुस्तकालयों और विद्वानों को संरक्षण मिला।
- मुगल काल में शाहजहानाबाद (पुरानी दिल्ली) फारसी, अरबी, गणित, खगोलशास्त्र और इस्लामी अध्ययन का प्रमुख केंद्र था।
- आधुनिक शिक्षा की नींव यहां ब्रिटिश शासन के दौरान मजबूत हुई।
- 1922 में स्थापित दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) ने राजधानी को उच्च शिक्षा का राष्ट्रीय केंद्र बना दिया।
- इसके बाद जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (1969), जामिया मिल्लिया इस्लामिया (1920, दिल्ली में 1925 से), IIT दिल्ली (1961), AIIMS (1956) और बाद में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (NLU Delhi) जैसे संस्थानों ने दिल्ली को देश के सबसे बड़े अकादमिक केंद्र के रूप में स्थापित किया।
- आज NIRF रैंकिंग में शामिल कई शीर्ष विश्वविद्यालय और संस्थान दिल्ली में स्थित हैं।

दिल्ली का मुखर्जी नगर और ओल्ड राजेंद्र नगर
पिछले तीन दशक में दिल्ली की एक और पहचान बनी है, देश के सबसे बड़े कोचिंग हब के रूप में। विशेष रूप से मुखर्जी नगर और ओल्ड राजेंद्र नगर UPSC अभ्यर्थियों की राजधानी माने जाते हैं। यहां हर साल देशभर से हजारों छात्र सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए पहुंचते हैं। इसके अलावा करोल बाग, बेर सराय और लक्ष्मी नगर जैसे इलाके SSC, बैंकिंग, CAT, CLAT, CUET, GATE और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के प्रमुख केंद्र बन चुके हैं। केवल ओल्ड राजेंद्र नगर और मुखर्जी नगर क्षेत्र में ही हजारों अभ्यर्थी किराये के कमरों और छात्रावासों में रहकर UPSC की तैयारी करते हैं। दिल्ली का कोचिंग उद्योग हजारों करोड़ रुपये की अर्थव्यवस्था में बदल चुका है, जिसमें कोचिंग संस्थान, पुस्तक बाजार, हॉस्टल और छात्र सेवाएं शामिल हैं।