टाटा समूह से जुड़े विवाद को लेकर कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी तथा केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। राहुल गांधी ने बुधवार को सीतारमण के आरोपों का जवाब देते हुए सवाल उठाया कि टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के प्रतिनिधियों को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आवास पर किस ‘कानूनी और व्यावसायिक मामले’ के सिलसिले में बुलाया गया था।
राहुल ने यह भी पूछा कि सरकार के करीबी कारोबारी के रूप में उन्होंने जिस व्यक्ति की ओर इशारा किया, वह इस विवाद में कब सामने आएगा और टाटा समूह के किन हिस्सों पर उसका नियंत्रण होगा। राहुल ने कहा कि देश के तीन-चार करीबी कारोबारी सहयोगियों को छोड़कर बाकी कारोबारी पहले ही सरकार से नाराज हैं और उन्हें भड़काने की जरूरत नहीं है। यह बयान टाटा समूह के भीतर एन. चंद्रशेखरन को दोबारा कार्यकारी चेयरमैन नियुक्त करने के फैसले पर उठे विवाद के बीच आया है।
राहुल गांधी ने निर्मला सीतारमण को क्या जवाब दिया?
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर दो बिंदुओं में अपनी बात रखी। उन्होंने वित्त मंत्री से पूछा कि टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के प्रतिनिधियों को अमित शाह के आवास पर बुलाने के पीछे ऐसा कौन-सा कानूनी और व्यावसायिक मामला था, जिसके लिए इस बैठक की जरूरत पड़ी। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सरकार के करीबी कारोबारी को लेकर जिस आशंका का उन्होंने जिक्र किया, वह कब सामने आएगा और टाटा समूह के किन हिस्सों पर उसका प्रभाव होगा। राहुल ने कहा कि भारत के कारोबारी पहले से ही सरकार से नाराज हैं और उन्हें किसी तरह उकसाने की जरूरत नहीं है। इससे पहले उन्होंने आरोप लगाया था कि टाटा समूह को नुकसान पहुंचाया जा रहा है और कारोबारी नेता इस मुद्दे पर बोलने से डर रहे हैं।
निर्मला सीतारमण ने राहुल गांधी पर क्या आरोप लगाए?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राहुल गांधी पर टाटा समूह के विवाद का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि राहुल को हर मुद्दे में राजनीति नहीं देखनी चाहिए और कानूनी या व्यावसायिक मामलों को बिना आधार आपराधिक बताने से बचना चाहिए। सीतारमण ने आरोप लगाया कि राहुल भारतीय उद्योग और उद्यमियों की उपलब्धियों पर बार-बार सवाल उठाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राहुल कारोबारी नेताओं को सरकार के खिलाफ अविश्वास फैलाने के लिए उकसाने की कोशिश कर रहे हैं। वित्त मंत्री ने राहुल को सलाह दी कि वे संकीर्ण राजनीतिक हितों के बजाय रचनात्मक तरीके से सरकार के साथ संवाद करें। उन्होंने अपने बयान में न्यायपालिका का भी जिक्र किया और कहा कि संविधान सभी नागरिकों को न्याय की गारंटी देता है तथा अदालतों की जिम्मेदारी इसे सुनिश्चित करना है।
कांग्रेस और भाजपा की आर्थिक नीतियों को लेकर क्या कहा गया?
सीतारमण ने कांग्रेस के शासनकाल की आर्थिक नीतियों पर निशाना साधते हुए ‘लाइसेंस-कोटा राज’ का उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की नीतियों ने दशकों तक भारतीय उद्यमियों की क्षमता को दबाए रखा और देश में गरीबी बढ़ाई। इसके विपरीत, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की नीतियों का बचाव करते हुए कहा कि उद्योग रोजगार पैदा करने और आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है। उनके मुताबिक, सरकार की नीतियां कारोबार को बढ़ावा देने, उद्योगों को समर्थन देने और निवेश आकर्षित करने के उद्देश्य से बनाई गई हैं। दूसरी ओर, राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा था कि भारतीय कारोबार को राजनीतिक नेताओं की निजी संपत्ति की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कारोबारी जगत की चुप्पी पर भी सवाल उठाए थे।
टाटा समूह में किस फैसले को लेकर विवाद है?
यह विवाद टाटा संस के कार्यकारी चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन को दोबारा नियुक्त करने के फैसले से जुड़ा है। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने इस नियुक्ति पर आपत्ति जताई है। 26 अक्तूबर को टाटा संस के कंपनी सचिव को लिखे पत्र में उन्होंने आरोप लगाया कि नियुक्ति की प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं किया गया। नोएल टाटा के मुताबिक, नियुक्ति के लिए चयन समिति की सिफारिश जरूरी थी, जो कथित तौर पर नहीं ली गई। उन्होंने कंपनी के नियमों के तहत प्रस्ताव की वैधता पर भी सवाल उठाया। उन्होंने बोर्ड बैठक की रिकॉर्डिंग, बैठक के मिनट्स और मतदान से जुड़ी जानकारी मांगी। साथ ही, उन्होंने कंपनी से नियामक संस्थाओं को यह बताने के लिए कहा कि नियुक्ति के प्रस्ताव की वैधता विवादित है। इस तरह टाटा समूह के भीतर नियुक्ति को लेकर उठे सवाल अब राहुल गांधी और निर्मला सीतारमण के बीच राजनीतिक बहस का विषय बन गए हैं।