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Rahul Gandhi: भाई के लिए फ्रंटफुट पर आईं प्रियंका, नेहरू पर टिप्पणी करने वाले 'दिनकर' की कविता का लिया सहारा!

सार

Rahul Gandhi: अदालत के फैसले के बाद प्रियंका गांधी, अपने भाई राहुल के लिए फ्रंटफुट पर आ गईं। प्रियंका गांधी ने उसी कवि 'रामधारी सिंह दिनकर' की चंद पंक्तियां 'समर शेष है' का जिक्र करते हुए लिखा, वे इस अहंकारी सत्ता के सामने सत्य और जनता के हितों की लड़ाई लड़ रहे हैं। सत्य की जीत होगी। जनता की आवाज जीतेगी...
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Priyanka Gandhi - फोटो : Amar Ujala/Rahul Bisht
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विस्तार
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गुजरात हाई कोर्ट ने शुक्रवार को मोदी सरनेम केस में कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की दो साल की सजा बरकरार रखी है। हाई कोर्ट ने उन्हें कोई भी राहत देने से मना कर दिया। अदालत के फैसले के बाद प्रियंका गांधी, अपने भाई राहुल के लिए फ्रंटफुट पर आ गईं। प्रियंका गांधी ने उसी कवि 'रामधारी सिंह दिनकर' की चंद पंक्तियां 'समर शेष है' का जिक्र करते हुए लिखा, जिन्होंने भरी संसद में प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर कठोर टिप्पणी कर दी थी। अपने भाई राहुल गांधी के लिए प्रियंका ने लिखा, वे इस अहंकारी सत्ता के सामने सत्य और जनता के हितों की लड़ाई लड़ रहे हैं। सत्य की जीत होगी। जनता की आवाज जीतेगी।

यह भी पढ़ें: Rahul Gandhi: राहुल को सुप्रीम कोर्ट से क्यों है उम्मीद, क्या राजनीतिक दलों के लिए मिसाल बनेगा अदालत का फैसला?

भरी संसद में 'दिनकर' ने कही थे ये बात ...

अंग्रेजी राज के दौरान रामधारी सिंह दिनकर की कविताएं सत्ता के खिलाफ आग उगलती थीं। आजादी के बाद भी दिनकर की कविताओं का तेवर नहीं बदला। उन्होंने प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के लिए भी कठोर शब्दों का प्रयोग किया। खास बात है कि जवाहरलाल नेहरू ने ही रामधारी सिंह दिनकर को राज्यसभा में भेजा था। इसके बावजूद दिनकर ने अपनी कविताओं की शैली नहीं बदली। जहां उन्हें कुछ गलत लगता, वे भरी संसद में बोल देते थे। एक बार उन्होंने संसद के भीतर प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की नीतियों की आलोचना कर दी। दिनकर ने कहा, 'देखने में देवता सदृश्य लगता है, बंद कमरे में बैठकर गलत हुक्म लिखता है, जिस पापी को गुण नहीं गोत्र प्यारा हो, समझो उसी ने हमें मारा है। इन पंक्तियों को सुनकर सदन में बैठे सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेता अवाक रह गए थे।

इस परिपाटी को प्रेरणा प्रधानमंत्री से मिली

हिंदी के अपमान पर दिनकर ने 20 जून, 1962 को राज्यसभा में कहा था, देश में जब भी हिंदी को लेकर कोई बात होती है, तो देश के नेतागण ही नहीं बल्कि कथित बुद्धिजीवी भी हिंदी वालों को अपशब्द कहे बिना आगे नहीं बढ़ते। पता नहीं इस परिपाटी का आरम्भ किसने किया है, लेकिन मेरा ख्याल है कि इस परिपाटी को प्रेरणा प्रधानमंत्री से मिली है। पता नहीं, तेरह भाषाओं की क्या किस्मत है कि प्रधानमंत्री ने उनके बारे में कभी कुछ नहीं कहा, किन्तु हिंदी के बारे में उन्होंने आज तक कोई अच्छी बात नहीं कही। मैं और मेरा देश पूछना चाहते हैं कि क्या आपने हिंदी को राष्ट्रभाषा इसलिए बनाया था, कि 16 करोड़ हिंदी भाषी लोगों को रोज अपशब्द सुनाएं। क्या आपको पता भी है कि इसका दुष्परिणाम कितना भयावह होगा।

प्रियंका गांधी ने दोहराई दिनकर की कविता ...

समर शेष है, जनगंगा को खुल कर लहराने दो

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शिखरों को डूबने और मुकुटों को बह जाने दो
पथरीली ऊँची जमीन है? तो उसको तोड़ेंगे
समतल पीटे बिना समर की भूमि नहीं छोड़ेंगे
समर शेष है, चलो ज्योतियों के बरसाते तीर
खण्ड-खण्ड हो गिरे विषमता की काली जंजीर

कांग्रेस पार्टी की महासचिव ने अपने ट्वीट में लिखा, अहंकारी सत्ता चाहती है कि जनता के हितों के सवाल न उठें, अहंकारी सत्ता चाहती है कि देश के लोगों की जिंदगियों को बेहतर बनाने वाले सवाल न उठें, अहंकारी सत्ता चाहती है कि उनसे महंगाई पर सवाल न पूछे जाएं। युवाओं के रोजगार पर कोई बात न हो, किसानों की भलाई की आवाज न उठे, महिलाओं के हक की बात न हो, श्रमिकों के सम्मान के सवाल को न उठाया जाए। अहंकारी सत्ता सच को दबाने के लिए हर हथकंडे आजमा रही है, जनता के हितों से जुड़े सवालों से भटकाने के लिए साम, दाम, दंड, भेद, छल, कपट: सब अपना रही है।

सत्ता का अहंकार ज्यादा दिन टिकेगा: प्रियंका

सत्य, सत्याग्रह, जनता की ताकत के सामने न तो सत्ता का अहंकार ज्यादा दिन टिकेगा और न ही सच्चाई पर झूठ का परदा। राहुल गांधी ने इस अहंकारी सत्ता के सामने जनता के हितों से जुड़े सवालों की ज्योति जलाकर रखी है। इसके लिए वे हर कीमत चुकाने को तैयार हैं और तमाम हमलों व अहंकारी भाजपा सरकार के हथकंडों के बावजूद एक सच्चे देशप्रेमी की तरह जनता से जुड़े सवालों को उठाने से पीछे नहीं हटे हैं। जनता का दर्द बांटने के कर्तव्य पथ पर डटे हुए हैं। सत्य की जीत होगी। जनता की आवाज जीतेगी।

 

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